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पुरातन विभाग की टीम ने किया ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण

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ऐतिहासिक स्थलों होगा सौंदर्यीकरण
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टीम ने किया सारागढ़ी गुरुद्वारे, शहीदी स्मारक व क्रांतिकारियों के गुप्त ठिकाने का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
चौदह करोड़ की ग्रांट से क्षेत्र के ऐतिहासिक इमारतों के सौंदर्यीकरण के लिए शुक्रवार को पुरातन विभाग की टीम ने छावनी स्थित ऐतिहासिक सारागढ़ी गुरुद्वारे परिसर, भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बार्डर पर बने शहीदी स्मारक तथा शहीद-ए-आजम भगत सिंह व उनके साथियों का गुप्त ठिकाना तूड़ी बाजार में बनी इमारत का दौरा किया। टीम के अधिकारियों ने कहा कि होने वाले कार्यों की संबंधित केंद्रीय विभाग को रिपोर्ट भेज जल्द ही कार्य शुरू करवाया जाएगा।
विधायक परमिंदर सिंह पिंकी ने बताया चार करोड़ से ऐतिहासिक सारागढ़ी गुरुद्वारे के परिसर में और विकास कार्य करवाए जाएंगे। इसके अलावा यहां पर सारागढ़ी की जंग में शहीद हुए जवानों की याद में म्यूजियम बनाया जाएगा। म्यूजियम में सारागढ़ी जंग से संबंधित तमाम वस्तुएं रखी जाएंगी, जिससे लोगों को सारागढ़ी का इतिहास पता चल सके। दस करोड़ से शहीदी स्मारक में लाइट साउंड सिस्टम के अलावा अन्य विकास कार्य करवाए जाएंगे। हुसैनीवाला बार्डर पर बने कैनाल रेस्ट हाउस की मरम्मत करवाई जाएगी, यह बहुत पुरानी इमारत है, जो एक ऐतिहासिक धरोहर है। फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार में शहीद-ए-आजम भगत सिंह व उनके साथियों के गुप्त ठिकाने का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसे म्यूजियम के तौर पर बनाया जाएगा। यहां शहीद भगत सिंह व उनके साथियों की यादगार वस्तुएं रखेंगे ताकि लोगों को शहीदों के इतिहास के बारे में पता चल सके। इस मौके पर पुरातन टीम की अगुवाई कर रहे कार्यकारी इंजीनियर प्रेम ग्रोवर (सलाहकार), कपिल अरोड़ा ने बताया कि विधायक पिंकी की सलाह से रिपोर्ट तैयार कर संबंधित केंद्रीय विभाग को भेजी जाएगी, ताकि जल्द कार्य शुरू हो सके।
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ऐतिहासिक हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन पर हो काम
समाजसेवी सुखदेव सिंह खालसा, सुरेंद्र सिंह व शिव नारायण ने कहा कि विधायक परमिंदर सिंह पिंकी ने बयान दिए थे कि दस करोड़ की मिली ग्रांट से हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन का भी सौंदर्यीकरण करेंगे। सुखदेव सिंह ने कहा कि विधायक एतिहासिक हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन पर कार्य करवाए। टूरिज्म को तभी बढ़ावा मिलेगा जब सही एतिहासिक स्थलों पर कार्य किया जाए। हुसैनीवाला पुल के पास बने कमरे को लोग स्टेशन समझते हैं, जबकि वह स्टेशन नहीं है। असल में स्टेशन सिंचाई विभाग की वर्कशाप के पीछे बना था और स्टेशन के यहां पर होने के सबूत भी आज भी हैं।
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