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मुस्लिम राजधानी आबूधाबी में हुआ पहले हिंदू मंदिर का शिलान्यास

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आबूधाबी में पहले हिंदू मंदिर का शिलान्यास
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शेख मुहम्मद बिन जैयद अल नाहयन ने 13.5 एकड़ भूमि उपहार में दी
राजस्थानी कारीगरों के तराशे गए गुलाबी पत्थर व संगमरमर से होगा निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। सनातन संस्कृति के विकास में उस समय एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी आबूधाबी शहर में स्वामी नारायण संस्था बीएपीएस ने हिंदू मंदिर का शिलान्यास शनिवार सुबह 9 बजे किया। कार्यक्रम में हजारों भारतीयों के अलावा संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय राजदूत नवदीप सूरी और एनएमसी ग्रुप के अध्यक्ष बीआर शेट्टी ने शिरकत की।
शिलान्यास समारोह की शुरूआत संस्था के अंतर्राष्ट्रीय सेवाओं के निदेशक ईश्वरचरण स्वामी ने संस्कृत श्लोकों के उच्चारण के साथ पूजन से की गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ संत आत्मस्वरूप स्वामी और आनंद स्वरूप स्वामी भी पहुंचे थे। यजमानों ने चावल, फूलों और शुष्क मेवों से उन ईंटों का पूजन किया। वातानुकूलित पंडाल में देश-विदेश से आए भक्तों व अन्य अतिथियों से खचाखच भरा था। शिलान्यास कार्यक्रम में संस्था के वर्तमान अध्यात्मिक मुखिया महंत स्वामी महाराज के अलावा सामुदायिक विकास सेवा निदेशक डा. मुघीर अली अल खायली, वातावरण मंत्री थानी अल जोयोदी, उच्च शिक्षा मंत्री अहमद बिहोल अल फाल्सी आदि उपस्थित थे। मंच पर बादशाह शेख जैयद के चित्र का अनावरण सहनशीलता वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया जबकि विश्व वंदनीय संत प्रमुख स्वामी महाराज का चित्र मंच की प्रतिमूर्ति के साथ दर्शाया गया था।
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भारतीय राजदूत नवदीप सूरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाते हुए लोगों को बधाई दी। मंदिर का निर्माण आबूधाबी एक्सप्रेस वे पर आबू मुरेखा क्षेत्र में किया जा रहा है। भूमि पूजन 11 फरवरी 2018 को किया गया था। मध्य पूर्व में संस्था के प्रभारी ब्रह्मबिहारी स्वामी ने इस मंदिर को सहनशीलता वर्ष का अद्भुत उपहार करार देते हुए कहा कि शेख मुहम्मद बिन जैयद अल नाहयन ने मंदिर निर्माण के लिए 13.5 एकड़ भूमि उपहार में दी है। पार्किंग के लिए भी सरकार भी इतनी ही भूमि उपलब्ध करवाएगी। यह अपने आप में अभूतपूर्व अवसर है जब संयुक्त अरब अमीरात के बादशाह पहले हिंदू मंदिर के निर्माण की सहमति के साथ-साथ सौगात के रूप में भूमि भी दान कर रहे हैं। मंदिर का निर्माण राजस्थान के कारीगरों की ओर से तराशे गए गुलाबी पत्थरों व संगमरमर से किया जाएगा जो समुद्र के रास्ते आबूधाबी तक पहुंचाए जाएंगे।
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