वीर हकीकत राय का बलिदान याद किया
श्री सनातन धर्म सभा आयोजित किया पुष्पांजलि समारोह
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। हकीकत राय चौक पर श्री सनातन धर्म सभा ने रविवार को वीर हकीकत राय की प्रतिमा पर माल्यार्पण व श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता श्री गोशाला मैनजिंग कमेटी के प्रधान फकीर चंद गोयल ने उनके जीवन चरित्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सभा के प्रधान सतनारायण गोयल, रामप्रकाश मित्तल, पिरथी राज गर्ग, महेश गोयल, अनिल नागौरी, सुभाष बांसल, पूर्णचंद बांसल, मुकेश तायल, गंगाधर बांसल आदि सहित बड़ी संख्या में लोगों ने वीर हकीकत राय को श्रद्धांजलि दी। अपने संबोधन में गोयल ने कहा कि पाकिस्तान के सियालकोट में सन 1719 में जन्में वीर हकीकत राय जन्म से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे। उन्होंने 4-5 वर्ष की आयु में ही इतिहास तथा संस्कृत आदि विषय का पर्याप्त अध्ययन कर लिया था। 10 वर्ष की आयु में फारसी पढ़ने के लिए मौलबी के पास मस्जिद में भेजा गया। वहां के मुसलमान छात्र हिंदू बालकों व हिंदू देवी देवताओं को अपशब्द कहते थे। इस पर बालक हकीकत उन सब के कुतर्को का प्रतिवाद करते हुए मुस्लिम छात्रों को वाद-विवाद में पराजित कर देता। एक दिन मौलवी की अनुपस्थिति में मुस्लिम छात्रों ने हकीकत राय से मारपीट की। बाद में मौलवी के आने पर उन्होंने हकीकत की शिकायत करते हुए कहा कि इसने बीबी फातिमा को गाली दी है।
यह बात सुन कर मौलवी बहुत नाराज हुऐ और हकीकत राय को शहर के काजी के सामने पेश किया। वहां वीर हकीकत राय के परिजनों ने काजी को सही बात बताने की कोशिश की लेकिन उसने एक न सुनी और शरीयत के अनुसार उसे सजा सुना दी कि या तो यह बालक मुसलमान बन जाए अन्यथा मृत्युदंड दिया जाएगा। हकीकत के माता पिता व सगे संबंधियों ने कहा कि हकीकत तू मुसलमान बन जा ताकि तू कम से कम जिंदा तो रहेगा। अपने धर्म पर वह बालक अपने निश्चय पर अडिग रहा। जल्लादों ने वर्ष 1734 को वसंत पंचमी वाले दिन वीर हकीकत राय को फांसी दे दी। उसके बाद से ही हर वर्ष वसंत पंचमी वाले दिन इस वीर बालक को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए धर्म की रक्षा के लिए उसके बलिदान को याद किया जाता है। ज्ञात हो कि वर्ष 1947 में भारत-पाक विभाजन से पहले हिंदू लोग वसंत पंचमी पर लाहौर स्थित उनकी समाधि पर इकट्ठा होकर उन्हें याद करते थे। विभाजन के बाद होशियारपुर जिले में उनकी दूसरी समाधि पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।