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अकाली दल के प्रधान के स्वागती समारोह में उलझे दो अकाली दिग्गज, प्लाट पर कब्जे को लेकर स्टेज पर ही सुनाई खरी-खरी

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स्वागत समारोह में उलझे दो अकाली दिग्गज
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प्लाट पर कब्जे को लेकर स्टेज पर ही सुनाई खरी-खरी
ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन का पूर्व विधायक मक्कड़ पर तीखा प्रहार, बोले-हमारे प्लाट पर कब्जा कर लिया मक्कड़ ने
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। अकाली दल के प्रधान विधायक गुरप्रात सिंह वडाला के स्वागती समारोह में दो अकाली दिग्गज स्टेज पर ही उलझ पड़े। ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन व शिअद की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह रायपुर ने स्टेज से ही अकाली दल के पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ को खरी खरी सुनानी शुरू कर दी और कहा कि चुनावों में अकाली दल की बुरी हार इसलिए हुई क्योंकि यहां पर उम्मीदवार बाहर से लाकर खड़ा कर दिया और इन्होंने हमारे प्लाट पर जबरन कब्जा भी कर लिया। शिअद के निगम चुनावों में कैंट हलके से अकाली दल का पूर्ण सफाया हो गया और 12 में से एक भी सीट अकाली दल नहीं जीत पाया।
पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ ने भी स्टेज से उत्तर दिया कि प्लाट की कई रजिस्ट्रियां हैं।
दरअसल, कैंट हलके में प्रधान गुरप्रताप सिंह वडाला का स्वागती समारोह में रखा गया था। जिसमें अकाली दल की टिकट पर 2017 में चुनाव लड़ने वाले सर्बजीत सिंह मक्कड़, आदमपुर से विधायक पवन कुमार टीनू, फिल्लौर से विधायक बलदेव खैहरा, पूर्व चेयरमैन परमजीत रायपुर, शाहकोट से अकाली दल के नेता बचित्र कोहाड़ सहित अकाली दल की महिला व युवा लीडरशिप थी।
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पहले बोलने का मौका परमजीत सिंह रायपुर को मिला तो उन्होंने पूरी भड़ास निकाली और कहा कि मुझे अकाली दल ने कैंट हलके से उस समय टिकट दी थी, जब कांग्रेस की हवा चल रही थी। मैंने मेहनत की तो अकाली दल ने जगबीर बराड़ को टिकट दे दी, जो कांग्रेस में चला गया। 2012 में दोबारा मैंने टिकट मांगी तो परगट सिंह को टिकट दे दी, वह भी कांग्रेस में चला गया। अब 2017 में टिकट मांगी तो कपूरथला से चुनाव लड़ने वाले सर्बजीत मक्कड़ को टिकट दे दी। मक्कड़ की मौजूदगी में ही रायपुर ने प्रहार कहा कि अकाली दल ने हलके के लोगों की राय नहीं ली, नतीजतन अकाली दल देहात हलके से सारी सीटें जीत गया, लेकिन कैंट में हार गया। यहां के लोग मक्कड़ को टिकट देने के हक में नहीं थे। मेरे प्लाट पर मक्कड़ ने कब्जा कर रखा है। चुनावों से पहले 2017 में एक महापुरुष ने हमारा राजीनामा करवा दिया और हमने दीवार तैयार कर दी, लेकिन मतदान के दिन शाम को ही मक्कड़ ने दीवार गिरा दी और दोबारा कब्जा कर लिया।
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वहीं रायपुर के प्रहार से पंडाल में बैठे अकाली दल के कार्यकर्ता आपस में कानों में बातें करने लगे और स्टेज पर बैठी लीडरशिप के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। माइक जब मक्कड़ के पास आया तो उन्होंने कहा कि प्लाट की कई रजिस्ट्रियां हैं, 2017 में मैं हलके में नया था। इसलिए कई बातें रायपुर की माननी पड़ी लेकिन अब साढ़े तीन साल का समय विधानसभा चुनावों में है, अब मुझसे आगे किसी की जरूरत नहीं। इस दौरान अकाली दल के कई नेता उठकर जाने लगे तो विधायक गुरप्रात सिंह वडाला ने उनको वापस बैठा लिया और कहा कि इससे गलत संदेशा जाएगा।
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