‘पुरातन ग्रंथों में स्वच्छता का संकल्प’ विषय पर चर्चा
कपूरथला। नई दिल्ली में साहित्य अकादमी की ओर से ‘पुरातन ग्रंथों में स्वच्छता का संकल्प’ विषय पर विचार-चर्चा समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि हमारे सभी धर्म ग्रंथ में कुदरत से जुड़े रहने का संदेश दिया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला श्लोक ही पर्यावरण पर केंद्रित है। सिख धर्म में सबसे अधिक कुदरत से जुड़कर रहने का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में वैश्विक तपिश का हल दिया गया है।
संत सीचेवाल कहा कि हम वाणी पढ़ते जरूर हैं, लेकिन इस पर अमल नहीं करते। इस वजह से सतलुज दरिया गंदा हो गया। यमुना और गोदावरी जैसी ऐतिहासिक नदियां गंदी हो गई हैं। श्री गुरु नानक देव ने तो पांच सदियों पहले ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का हल दिया था, लेकिन बड़े दुख की बात है कि वाणी पढ़ने-सुनने वालों ने इस पर अमल नहीं किया। इस दौरान साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवास राव, कपिल कपूर, फरीदा खानम, भाई सागर जैन, विजय कुमार, निरंजन देव भारद्वाज और बलबीर सिंह माधोपुरी समेत अन्य साहित्यकार मौजूद थे।