एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद कई पेड़ गायब
कांजली बेईं से सटे बागवानी-जंगलात विभाग के जंगल में जांच को पहुंचे कंजरवेटर
20-22 सितंबर तक चले अंधड़ व बारिश से गिरे पेड़ों की आड़ में आठ से दस पेड़ काटे जाने की शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के प्रतिबंध के बावजूद पेड़ों को खुर्द-बुर्द करने की कवायद जारी है। बीते माह 20 से 22 सितंबर तक चले अंधड़ व बारिश से टूटे पेड़ों की आड़ में वृक्षों को काटकर खुर्द-बुर्द करने की आशंका पर शनिवार को जंगलात विभाग के कंजरवेटर अचानक जांच के लिए कपूरथला पहुंचे। उनके साथ जंगलात विभाग के रेंज अफसर, बागवानी विभाग के इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद थे। कपूरथला की कांजली बेईं से सटे जंगल में बागवानी विभाग और जंगलात विभाग का संयुक्त जंगल है। जहां पर कुछ पेड़ टूट कर गिर गए, जिसकी आड़ में कुछ पेड़ों को काटकर गायब कर दिया गया। बताया जा रहा है कि कटे हुए पेड़ों की संख्यां 12 के करीब हैं, लेकिन मौके पर छह से अधिक पेड़ों कटे हुए पाए गए हैं। जांच को पहुंचे कंजरवेटर ने कहा कि पेड़ों की कोई कमी नजर नहीं आई है। जो पेड़ कटे हैं, उसकी जांच करवाई जाएगी। जंगलात की भूमि पर माइनिंग और बिना एनओसी लिए कालोनियां काटे जाने के मामले पर बोले कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसकी भी निष्पक्ष तौर पर जांच करवाई जाएगी। पेड़ों के खुर्द-बुर्द होने का मामला उजागर होने के बाद दोनों विभाग एक दूसरे के पेड़ होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। बागवानी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर कुलविंदर सिंह ने कहा कि उनके कुछ ही पेड़ हैं, जो उनके कार्यालय में मौजूद हैं। जिनकी लिखित कार्रवाई पूरी करके नीलामी करवाई जाएगी। बाकी पेड़ जंगलात विभाग के हैं। जबकि जंगलात विभाग के रेंज अफसर दविंदरपाल सिंह ने कहा कि वह अभी कुछ नहीं बता सकते हैं। जंगलात विभाग के सभी पेड़ मौजूद हैं। लेकिन जब उनसे कार्यालय में कटे पेड़ों के बारे में पूछा गया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए।