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सेंट्रल जेल फिरोजपुर में मिलती है वीआईपी बैरिक, किराया पचास हजार-छीना

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‘दो अधिकारी करते हैं जेल में वीआईपी बंदोबस्त’
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वीआईपी बैरक का किराया 50 हजार से एक लाख रुपये महीना: छीना
चेकिंग में जेल अधिकारियों के भय से कोई कैदी व हवालाती नहीं बोलता
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
भाजपा के पूर्व पंजाब प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा के ओएसडी अमरिंदर सिंह छीना ने शुक्रवार सेंट्रल जेल फिरोजपुर के कुछेक अधिकारियों पर जेल में पैसे लेकर सुविधा मुहैया करवाने और बैरक किराये पर देन का आरोप लगाया है। प्रेस कांफ्रेंस में छीना ने कहा कि जेल अधिकारियों की प्रापर्टी की जांच की जाए तो इनकी आय से अधिक संपत्ति उजागर होगी। छीना तस्करों का साथ देने व अन्य कारणों से सेंट्रल जेल फिरोजपुर में लगभग चार माह तक बंद थे।
छीना ने बताया कि वह एक राजनीतिक केस में सेंट्रल जेल फिरोजपुर में बंद थे। उन्होंने जेल में देखा कि जेल में नशा बाहर की तुलना में अधिक है। प्रत्येक प्रकार का नशा जेल में मिलता है। यही नहीं फिरोजपुर सेंट्रल जेल में दो ऐसे अधिकारी हैं, जो मोटी रकम लेकर वीआईपी बैरक किराए पर देते हैं। एक माह का किराया पचास हजार से एक लाख रुपये तक होता है, इन बैरकों में वीआईपी सुविधा है। फिरोजपुर के दो जेल अधिकारियों ने उस पर दबाब बनाकर उसे वीआईपी बैरक लेने पर मजबूर किया और उससे दस हजार रुपये प्रतिमाह लेते थे।
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छीना ने आरोप लगाते हुए प्रभावशाली लोगों के लिए जेलों में कोई मुश्किल नहीं है। वीआईपी बैरक में तलाशी नहीं होती। बाकी बैरकों में तलाशी की जाती है। वीआईपी बैरक में मोबाइल इस्तेमाल कर सकते हैं। जब कभी जेल में जिला एवं सेशन जज व डीसी निरीक्षण करने आते हैं तो उन्हें वीआईपी बैरकों तक जाने नहीं दिया जता है। जब औचक निरीक्षण होता है तो जेल प्रशासन वीआईवी बैरकों से खुद मोबाइल फोन व अन्य सुविधा वाली वस्तुएं हटा देते हैं। जेल अधिकारियों के भय के कारण कोई कैदी व हवालाती जिला एवं सेशन जज के सामने बोलता नहीं, जिससे टीम को लगता है कि जेल में सब कुछ ठीक है।
छीना के मुताबिक जेलों में गैंग बने हैं और जेलों में लड़ाईयां भी होती हैं और लड़ाईयों में मरने वाले लोगों को हार्ट अटैक बना कर पेश किया जा चुका है, उनके सामने भी एक कैदी की लड़ाई दौरान मौत हो चुकी थी उसे दिल का दौरा बताकर केस खत्म कर दिया गया था। इस केस संबंधी उसने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व पंजाब पुलिस को पत्र लिखे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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सूबे की जेलों में रह चुके गुरमीत सिंह का कहना है कि पंजाब में कोई गैंग नहीं है कुछ नौजवानों की आपसी रंजिश है, जिसे गैंगस्टर का नाम दिया जा रहा है। किसी भी गैंगस्टर कहलाने वाले के घरवाले खुश या सुखी नहीं है पंजाब पुलिस और राजनीतिक नेता अपना नाम चमकाने के लिए इन नौजवानों के नाम सहारा लेते हैं। गुरमीत सिंह ने बताया कि पाकिस्तान में कुलभूषण की मां और पत्नी के साथ जो हुआ वह हमारे देश की जेलों में भी होता है। तलाशी के समय महिलाओं के कपड़े तक उतारे जाते हैं। उधर, जेल सुपरिंटेंडेंट राणा का कहना है कि छीना के सभी आरोप बेबुनियाद है। छीना जेल से रिहा हुए एक साल हो चुका है। अब छीना की किसके साथ रंजिश है, जो ये आरोप लगा रहा है। जब जेल से रिहा हुआ था तब क्यों नहीं बोले। राणा ने कहा कि जेल में कोई वीआईपी बैरक नहीं है।
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