भुगतान के बगैर बच्चों को मिड-डे मील मिले तो कैसे
- शिक्षकों ने उठाए सवाल, तीन माह से नहीं हुई अदायगी
- मजबूरन अपनी जेब से मिड-डे-मील का इंतजाम कर रहे शिक्षक
महेश कुमार
कपूरथला।
कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद कराने के बाद से ही आलोचना झेल रही पंजाब सरकार अब सरकारी स्कूलों के मामले में ही एक बार फिर घिर गई है। इस बार वजह मिड-डे मील है। मामले में शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं कि तीन माह से भुगतान न होने की स्थिति में वे बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराएं भी तो कैसे। स्थिति यह है कि शिक्षकों को मजबूरन अपनी जेब से मिड-डे-मील का इंतजाम करना पड़ रहा है। ऐसे में कहीं रोजना ही खिचड़ी बन रही है, तो कहीं बच्चों को खाने के लिए केवल नमक वाले चावल दिए जा रहे हैं।
कपूरथला में 811 प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील परोसा जाता है। मध्य अगस्त, सितंबर और अक्टूबर की करीब सवा करोड़ रुपये की पेंडिंग राशि और 60 लाख के करीब नवंबर माह का बजट भेजा गया है। इसे अभी तक सरकार की ओर से मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में शिक्षकों के लिए जेब से मिड-डे मील का मेन्यू मेनटेंन करना मुश्किल हो गया है। ढाई माह ही उधारी चढ़ने और जेब से पैसे खर्च करने के बाद शिक्षक हांफ चुके हैं।
कहीं मिल रही खिचड़ी तो कहीं केवल नमक वाले चावल :
शिक्षकों का कहना है कि सूबे के सरकारी स्कूलों में खिचड़ी ‘राष्ट्रीय व्यंजन’ घोषित हो चुकी लगती है। स्कूलों में बच्चों को खिचड़ी और नमक वाले चावल ही परोसे जा रहे हैं। मिड-डे-मील का बजट माइनस में चल रहा है। इस समय 1.85 करोड़ रुपये जिले के स्कूलों में मिड-डे-मील सुचारु करने के लिए चाहिए। जबकि सूबे के सभी स्कूलों को मिलाकर यह धनराशि 53 से 54 करोड़ रुपये तक जा सकती है। कई जगह पर शिक्षकों ने मिड-डे-मील बंद करने के लिखित तौर पर बीपीईओ को पत्र भी भेजने शुरू कर दिए हैं।
अफसर लाचार :
डीईओ एलीमेंटरी गुरचरण सिंह का कहना है कि तीन माह से मिड-डे-मील का बजट रिलीज नहीं हुआ है। करीब ढाई माह की पेंडेंसी भी चल रही है, लेकिन उन्होंने किसी भी स्कूल में खिचड़ी या नमक वाले चावल परोसे जाने की बात से साफ मना कर दिया। कहा कि हर दिन का मेन्यू फिक्स है, उसके हिसाब से ही खाना बनाकर परोसा जाना है, खिचड़ी तो मेन्यू में है ही नहीं। जब उन्हें जमीनी हकीकत का अहसास करवाया गया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए। हालांकि कहा कि 1.85 करोड़ रुपये का प्रपोजल स्टेट को लिखकर भेजा हुआ है। राशि आते ही स्कूलों मुखियों को बकाया और नवंबर माह का बजट रिलीज कर दिया जाएगा। डीसी मोहम्मद तैय्यब ने मिड-डे-मील के फंड न होने की बात कबूली, लेकिन खिचड़ी परोसे जाने की बात से अनभिज्ञता जताई। बस, इतना ही कहा कि सरकार से राशि आते ही फंड रिलीज कर दिए जाएंगे।
ये है मेन्यू
सोमवार को दाल-रोटी, मंगलवा को दाल-चावल, बुुधवार को काले चने-रोटी, वीरवार को कढ़ी-चावल, शुक्रवार को मौसमी सब्जी-रोटी और शनिवार को दाल-चावल।