फरीदकोट। प्रदेश सरकार ने नीट-2019 के नतीजे की घोषणा के एक दिन बाद राज्य के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों समेत सभी 8 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स की 1125 सीटों पर दाखिले लेने के नियम में बड़ा फेरबदल कर दिया है। राज्य के मेडिकल शिक्षा व खोज विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इस साल एमबीबीएस में दाखिले लेने के लिए विद्यार्थी के पास पंजाब का डोमिसाइल सर्टिफिकेट होना ही जरूरी है। इससे पहले पंजाब में दाखिले लेने के लिए विद्यार्थियों का 11वीं व 12वीं कक्षा सूबे से पास होनी जरूरी थी और इस साल से इसमें 10वीं कक्षा को भी शामिल किया गया था।
सूबे में पिछले लंबे समय से नियम बना हुआ था कि एमबीबीएस में दाखिले लेने के इच्छुक विद्यार्थियों की 11वीं व 12वीं पंजाब से की होनी चाहिए। साल 2014 में पंजाब सरकार ने इसमें 10वीं कक्षा भी पंजाब से की होनी लाजिमी कर दिया गया, जिसे कुछ विद्यार्थियों ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर फैसला 2016 में आया था। हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर प्रदेश सरकार ने मार्च 2016 में अधिसूचना जारी करते हुए प्रावधान किया था कि सेशन 2019-20 से एमबीबीएस में दाखिला लेने के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट के साथ साथ विद्यार्थी की 10वीं, 11वीं व 12वीं कक्षा भी पंजाब से की होनी चाहिए।
नीट का नतीजा घोषित होने के अगले दिन वीरवार शाम मेडिकल शिक्षा व खोज विभाग ने मार्च 2016 में जारी उस अधिसूचना को वापस ले लिया और नई अधिसूचना जारी करते हुए इस सेशन से दाखिले के लिए सिर्फ पंजाब का डोमिसाइल सर्टिफिकेट होना ही लाजिमी किया है, जबकि 10वीं से 12वीं की कक्षाएं किसी भी राज्य से की हो। इस नए नियम से हिमाचल प्रदेश व हरियाणा के उन विद्यार्थियों को करारा झटका लगा है। चूंकि दोनों राज्य में डोमिसाइल सर्टिफिकेट के आधार पर ही दाखिले का प्रावधान है और वह पंजाब में दाखिले लेने की मंशा से 11वीं व 12वीं कक्षा करने के लिए चंडीगढ़ के आसपास पंजाब के स्कूलों में दाखिले ले लेते थे। ऐसे करके वह अपने राज्य के साथ साथ पंजाब में दाखिले के लिए योग्य बन जाते थे लेकिन इस सेशन से ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।