हड़ताल पर रहे डाक्टर
सरकार ने फिलहाल वापस लिया बिल, पार्लियामेंट्री कमेटी को भेजा
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर।
नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने के सरकार के नए प्रस्ताव के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से जुड़े देशभर के करीब 3 लाख डॉक्टर मंगलवार को हड़ताल पर चले गए। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने एलान किया था कि 2 जनवरी को देशभर के लगभग सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टर सेवाएं नहीं देंगे। इसके चलते महानगर के सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी चिकित्सा सेवाएं ठप् रखी। हालांकि हड़ताल के बावजूद डाक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं बहाल रही। इस दौरान डाक्टरों के वफद ने डा. बीएस जौहल के नेंतृत्व में डीसी को मांग पत्र भी सौंपा।
सरकार ने फिलहाल इस बिल को फिलहाल वापल लेने का फैसला किया है। सरकार ने इस बिल को पार्लियामेंट्री कमेटी को भेज दिया गया है। यह कमेटी डाक्टरों के वफद के साथ मीटिंग करके इस बिल में बदलाव करके पेश किया जाऐगा। आईमा के प्रधान डा. बीएस जौहल का कहना है कि यह डाक्टरों के विश्वास की जीत है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया देशभर के मेडिकल प्रोफेशनल्स की प्रतिनिधि संस्था है। देश का कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर इसका चुनाव लड़ सकता है और अपना लीडर चुनने के लिए वोट कर सकता है। नेशनल मेडिकल कमीशन बनने के बाद इसमें सरकार की ओर से चुने गए चेयरमैन व सदस्य रखे जा सकेंगे।
इसके अलावा बोर्ड सदस्यों को कैबिनेट सचिव के अधीन में काम करने वाली सर्च कमेटी चुनेगी। इंडियन मेडिकल काउंसिल को नेशनल मेडिकल कमीशन बिल 2017 के प्रावधानों से एतराज है। पुराने बिल के मुताबिक अब तक प्राइवेट मेडिकल कालेजों में 15 प्रतिशत सीटों की फीस मैनेजमेंट तय करती थी। अब नए बिल के मुताबिक मैनेजमेंट को 60 प्रतिशत सीटों की फीस तय करने का अधिकार होगा। इसमें पहले 130 सदस्य होते थे व हर राज्य के तीन प्रतिनिधि होते थे। अब नए बिल के मुताबिक कुल 25 सदस्य होंगे, जिसमें 36 राज्यों में से केवल 5 प्रतिनिधि ही होंगे।