पराली से बिजली बनाने के लिए दक्षिण की कंपनी के साथ करार
- दस हजार करोड़ से पंजाब में पावर प्लांट लगाएगी कंपनी : डा. सुनकारिया
- एमओयू पर हस्ताक्षर के साथ सरकार से हुआ अनुबंध
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
विज्ञान, प्रोद्यौगिकी और पर्यावरण के प्रिंसिपल सचिव पंजाब डॉ. रोशन सुनकारिया ने कहा है कि सूबे में पराली से जुड़े अहम मुद्दे के समाधान का रास्ता निकाल लिया गया है। पराली से बिजली बनाई जाएगी। साउथ की एक कंपनी दस हजार करोड़ की लागत से सूबे में पावर प्लांट स्थापित करेगी, जहां पर पराली से बिजली उत्पादन होगा। पूरे पंजाब में अलग-अलग जगह यह प्लांट स्थापित होंगे। डॉ. सुनकारिया वीरवार को पुष्पा गुजराल साइंस सिटी में स्थापित इनोवेशन हब का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद किसानों का रुझान तो बदला है, लेकिन अब सरकार ने 20 प्रतिशत पराली के वैकल्पिक इस्तेमाल का रास्ता निकाल लिया है। जबकि 80 प्रतिशत को खेतों में ही मिक्स करने की योजना है। अब इसका प्रयोग बिजली उत्पादन के मामले में होगा। इससे पर्यावरण प्रदूषित होने से बचेगा। वहीं सूबे में बिजली उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की सिरदर्दी कम हो जाएगी। इस कंपनी से दस दिन पहले पंजाब सरकार ने एमओयू पर साइन किया है, लेकिन इससे पहले उन्होंने खुद प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, कृषि मंत्री, पर्यावरण मंत्री समेत तमाम अधिकारियों से उन्होंने खुद मुलाकात की। उसके बाद ही एमओयू साइन किया गया है।
किसानों की गिरदावरी पर लाल इंदराज मामले में लिया यू-टर्न :
पराली जलाने वाले किसानों की गिरदावरी में लाल इंदराज की बात पर प्रिंसिपल सचिव ने यू-टर्न लेते हुए कहा है कि ऐसा तो किसी ने नहीं कहा था। देश के अन्न भंडार में 50 हजार करोड़ रुपये का योगदान पंजाब फसलों के रूप में देता है। ऐसा कर दिया तो किसानों का मनोबल गिरेगा। यह बात बिल्कुल गलत है।
प्रति वर्ष 20 मिलियन टन पराली का प्रबंधन था चुनौती :
प्रिंसिपल सचिव डॉ. रोशन सुनकारिया ने कहा कि पंजाब सरकार के लिए प्रति वर्ष 20 मिलियन टन पराली का प्रबंधन चुनौती था। 20 प्रतिशत से इथेनॉल व अन्य बायोमॉस बनाया जाना था, लेकिन शेष के लिए पराली से बिजली उत्पादन से बढ़िया और कोई विकल्प नहीं था। इससे कितनी मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, इस बारे में अभी कहना मुश्किल होगा।
प्रिंसिपल सचिव ने साइंस सिटी में इनोवेशन हब का किया उद्घाटन
इनोवेशन हब का उद्घाटन करने के बाद इसके बारे में डॉ. रोशन सुनकारिया ने बताया कि कपूरथला में अपनी तरह का यह नार्थ इंडिया का पहला हब है। देश में 40 से 50 ऐसे हब खोले जाने हैं। करीब एक करोड़ की लागत से तैयार हुआ है। यहां पर पंजाब के बच्चे अपने इनोवेटिव आइडिया शेयर कर उन्हें मूर्त रूप दे सकेंगे। इससे पंजाब साइंटिस्ट बनाने की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि यह भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम की स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ इनोवेशन एंड क्रिएटविटी के तहत साइंस सिटी में स्थापित किया गया है। तीन साल तक राज्य सरकार इसे चलाएगी, उसके बाद कोई विकल्प तलाशेंगे। डायरेक्टर साइंस सिटशी डॉ. राजेश ग्रोवर ने बताया कि वार्षिक फीस के अलावा आइडिया को विकसित करने के लिए तमाम तरह की सामग्री साइंस सिटी की ओर से बच्चों को मुहैैया करवाई जाएगी। इस इनोवेशन के लिए आइडिया हासिल करने के लिए स्कूल-कालेजों में बॉक्स स्थापित किए जाएंगे।
इनोवेशन हब में रोबोटिक्स सेक्शन भी स्थापित
साइंस सिटी के डायरेक्टर जनरल-कम-डीसी कपूरथला मोहम्मद तैय्यब ने बताया कि विद्यार्थियों के लिए सदस्यता राशि 500 रुपये वार्षिक रखी गई है। इसमें इनोवेशन रिसोर्स सेंटर, इनोवेशन लैब, डिजाइन स्टूडियो, तोड़-फोड़ व जोड़, कबाड़ से जुगाड़ के अलावा रोबोटिक्स सेक्शन स्थापित किया गया है।