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ईजीएस शिक्षक आरपार की लड़ाई या किसानों की तर्ज पर सुसाइड के मूड में

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‘सरकार के बराबर चलाएंगे विस सत्र’
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वालंटियर शिक्षकों ने मांगों के लिए आर-पार की लड़ाई का मन
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
अब वालंटियर शिक्षकों ने मांगों के समर्थन में पंजाब सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने का मूड बना लिया है। यहीं नहीं, मांग पूरी न होने पर सपरिवार सरकार के बराबर विधानसभा सेशन चलाने का मन बना लिया है। साथ ही किसानों की तर्ज पर सुसाइड का रास्ता अख्तियार करने की योजना बना रहे हैं। इसकी घोषणा ईजीएस, एआईई, एसटीआर अध्यापक यूनियन की प्रांतीय नेता स्वर्णा देवी बठिंडा, निशांत कुमार कपूरथला, आराधना फरीदकोट, जश्नजोत कौर, कुलवंत कुमारी व कर्मजीत कौर ने की है।
शिक्षक नेताओं ने बताया कि समूह वालंटियर शिक्षक 2003 से सरकारी स्कूलों में 5000 रुपये मासिक मेहनताने पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह मेहनताना भी कभी समय पर नहीं मिला है। वहीं उनसे इतने कम मेहनताने में रेगुलर शिक्षक के बराबर काम लिया जा रहा है। पूर्ववर्ती अकाली-भाजपा सरकार के समय भी उन लोगों ने अपनी मांगों को लेकर खूब संघर्ष किया। उस समय उनके धरने पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और वित्त मंत्री मनप्रीत बादल आए और वादा किया कि उनकी सरकार आने पर रेगुलर कर दिया जाएगा।
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अब हालात यह बन चुके हैं कि जब हम लोग किसी मंत्री के पास जाते हैं तो वह कह देते हुए शिक्षा सचिव के पास जाओ। जब शिक्षा सचिव के पास जाते हैं तो वह कह देते हैं कि आपकी मांगों पर सरकार को फैसला करना है। शिक्षा मंत्री फोन ही नहीं उठाते हैं। सरकार की इस बेरूकी के कारण ही अध्यापक निजी और सामाजिक परेशानियां झेल रहे हैं। अधिकतर तो नौकरी पाने की उम्र पार कर चुके हैं और इतने कम वेतन के चलते कई की विवाह की उम्र भी निकल चुकी हैं। पैसों की तंगी के कारण बहुत से विवाहित शिक्षकों के तलाक की नौबत आ गई है। हताश शिक्षक किसानों की तर्ज पर आत्महत्याओं का मन बनाने लगे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि आने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में ईजीएस, एआईई, एसटीआर अध्यापकों को प्री-नर्सरी पोस्टों पर रेगुलर करने का प्रस्ताव पारित नहीं किया तो समूह अध्यापक सरकार के बराबर विधानसभा का सेशन चलाएंगे। उन्होंने समूह अध्यापकों से अपील की कि सभी अध्यापक परिवार समेत एकत्रित हों, जिससे सरकार को ईंट का जवाब पत्थर से दिया जा सके।
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