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कनाडा में कोई खालिस्तान लहर नहीं, ट्रूडो के दौरे के बाद रिश्तों में हो रहा बदलाव

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कनाडा की आंतरिक सुरक्षा को भी खालिस्तानियों से खतरा : संघा
कनाडा में ब्रैंप्टन के सांसद बोले- कनाडा में खालिस्तानी लहर नहीं, रिश्तों में हो रहा बदलाव
1.5 फीसदी लोग ही खालिस्तान की मांग कर रहे हैं, वजूद नहीं उनका
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। कनाडा में कोई खालिस्तान की कोई लहर नहीं है, सिर्फ 1.5 फीसदी लोग हैं जो खालिस्तान की बात करते हैं, लेकिन उनका कोई वजूद ही नहीं है। ऐसे कुछ लोग बार बार बात करते हैं, लेकिन लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है और यह धारणा बिलकुल गलत है कि पंजाबी मूल के कनाडा में रहने वाले लोग खालिस्तान के पक्षधर हैं। यह बात कनाडा के ब्रैंप्टन से सांसद रमेश संघा ने शनिवार को जालंधर में पत्रकार वार्ता में कही। उनके साथ पंजाब के पीपीसीसी के महासचिव मनोज अरोड़ा भी थे।
सांसद संघा ने कहा कि कनाडा की आंतरिक सुरक्षा को भी खालिस्तान आतंकियों से खतरा है। यह रिपोर्ट कुछ समय पहले ही आई थी, जिसमें गलती से सिख खालिस्तानी आतंकवादी लिख दिया गया था। लेकिन कनाडा के आंतरिक सुरक्षा मंत्री रालफ गोडेल ने सिख अक्षर को डिलिट कर दिया है और यह मामला खत्म हो गया है। सांसद संघा ने कहा कि कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रडो की भारत यात्रा के बाद से ही दोनों देशों खासकर पंजाब के साथ रिश्तों में सुधार हो रहा है।
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जस्टिन ट्रूडो की नीतियों का नतीजा है कि अब पंजाबी लोग भारी संख्या में कनाडा जा रहे हैं। कनाडा सरकार उनको सहयोग कर रही है। सांसद संघा का कहना है कि वह कनाडा-भारत संसद की फ्रैंडशिप कमेटी के चेयरमैन हैं और दावा है कि दोनों देशों के बीच काफी अच्छे संबंध बन रहे हैं। रेफरेंडम 20-20 पर संघा ने दोबारा कट्टरपंथियों पर निशाना साधा और कहा कि कनाडा के लोग इसके पक्ष में नहीं है, यह लहर सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही है। ऐसी लहर चलाने वालों का कनाडा में कोई वजूद नहीं है और लोग उनके साथ जुड़ना पसंद नहीं करते हैं।
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