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पंजाब में लड़कियों के लिए अब अलग से प्राइमरी स्कूल नहीं

Mon, 21 Oct 2013 01:47 AM IST
चंडीगढ़/हमीर सिंह
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पंजाब में लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से बनाए प्राइमरी स्तर के स्कूल अब नहीं रहेंगे।
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शिक्षा विभाग लड़कियों के लिए अलग से खोले इन स्कूलों को लड़कों के स्कूलों में मर्ज कर देगा। यह फैसला शिक्षा मंत्री द्वारा विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठकों के बाद लिया गया।

पंजाब सरकार ने 31 मार्च को किए फैसले में राज्य के 690 प्राइमरी स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज करने का फैसला किया था। इसका विरोध होने पर फैसला स्थगित कर दिया, लेकिन शिक्षा विभाग ने अपनी नीति वापस नहीं ली।
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सूत्रों के अनुसार अब जिला और राज्य स्तर के विभागीय अधिकारियों के साथ शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मूलका द्वारा की गई बैठकों के बाद एक नीति बना दी गई है। इस नीति के तहत किसी गांव या कस्बे में यदि एक किलोमीटर के दायरे में लड़के और लड़कियों के दो प्राइमरी स्कूल चल रहे हैं तो इनको एक दूसरे में मर्ज कर दिया जाएगा।

मर्जर के मौके एक स्कूल को मूलभूत ढांचा बेहतर वाले स्कूल में मर्ज किया जाएगा। यदि किसी स्कूल में मूलभूत सुविधाएं न हों तो दोनों स्कूलों को सह-शिक्षा (कोएड) स्कूल घोषित कर दिया जाएगा। इसके अलावा जिन दो स्कूलों की दीवार साझी हैं, उनको भी एक दूसरे में मर्ज करने का फैसला किया गया है।

हैरानी की बात यह है कि पहले 20 या इस से कम बच्चों वाले स्कूलों को एक दूसरे में मर्जर का फैसला किया गया था। अब 20 बच्चों से ज्यादा वाले स्कूल भी मर्ज हो सकेंगे, लेकिन जिस स्कूल में मर्ज किया जाना है उसके बाद मूलभूत ढांचा होना चाहिए।

नए अध्यापक भर्ती करने के बजाय इनको ही पास के स्कूलों में भेज दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने इस नीति की पुष्टि की है।


शिक्षा का अधिकार कानून
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत एक किलोमीटर के भीतर प्राइमरी स्कूल की सुविधा प्रदान करना जरूरी है। राज्य सरकार ने अपना ही तर्क निकाला है कि एक किलोमीटर के दायरे में यदि एक से ज्यादा स्कूल हैं इनको बंद कर दिया जाए।
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हालांकि राज्य में कानून की धाराओं का पालन न करने वाले सैकड़ों निजी स्कूल बंद हो रहे हैं तो इनसे आने वाले बच्चों को कैसे सभी सरकारी स्कूलों में जगह दी जाएगी, यह सवाल अभी खड़ा है।
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