सूफी गायक हंसराज हंस के इस्लाम धर्म अपनाने को लेकर अभी संशय बरकरार है। बुधवार को ही ऐसी खबरें की चर्चा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हंस ने खुद इसका खंडन किया था। हालांकि फोन पर हुई बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि सभी धर्म तो एक समान ही हैं।
इस बीच धर्मांतरण की चर्चा जोर पकड़ने पर हंस ने वीरवार को अचानक मीडिया से दूरी बना ली और अपनी कोठी पर भी नजर नहीं आए। इस बीच उनके बेटे युवराज हंस ने भी धर्मांतरण की खबरों को निराधार करार दिया है।
हंस की कोठी पर वीरवार को सच्चाई जानने के लिए जुटे मीडिया कर्मियों को निराशा हाथ लगी। वहां तैनात सिक्योरिटी मुलाजिमों ने बताया कि वे मुंबई चले गए हैं। इस बीच वीरवार को उन्होंने फोन पर भी मीडिया से दूरी बनाए रखी। उनके करीबियों की मानें तो हंस का पाकिस्तानी सूफी व गजल गायकों के साथ पुरानी घनिष्ठता रही है।
गुलाम अली जैसे गजल गायकों को वे अपना गुरु मानते रहे हैं। उधर, लाहौर में हंसराज हंस के इस्लाम धर्म अपनाने और अपना नाम बदल कर मोहम्मद यूसुफ रखने की खबरों पर शहरवासी भी स्तब्ध हैं। वैसे इस संबंध में चर्चा जोर पकड़ने केक बाद भी हंस राज हंस ने अपनी ओर से कोई लिखित बयान भी जारी नहीं किया है।
दूसरी ओर हंस के बेटे युवराज हंस का कहना है कि ऐसी कोई बात नहीं है। उनके पिता ने इस्लाम धर्म नहीं अपनाया है। पाकिस्तान मीडिया की तरफ से यह खबर कैसे आई, वह खुद इससे अंजान हैं।
गायकी के लिए मिल चुका है पद्मश्री
हंसराज हंस को उनकी सूफियाना गायकी के लिए भारत सरकार की ओर से पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। वह शिरोमणि अकाली दल के उपाध्यक्ष हैं और शिअद की तरफ से 2009 में लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।चर्चा है कि हंस दिवंगत पाकिस्तानी गायक नुसरत फतेह अली खां से काफी प्रभावित हैं। अब वे पाकिस्तान में ही सूफी गायकी के क्षेत्र में भविष्य संवारना चाहते हैं।
सोशल साइटों पर चला टिप्पणियों का दौर
हंसराज हंस ने इस्लाम धर्म अपनाया है या नहीं? इन सवालों से जुड़ी सच्चाई के बारे में तो अधिकारिक तौर पर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है, लेकिन सोशल साइट्स पर इसको लेकर टिप्पणियां शुरू हो चुकी हैं। हंस के इस्लाम धर्म अपनाने को कोई उसकी अपनी सवतंत्रता बता रहा है तो कोई उसकी निंदा कर रहा है।