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Ground Report: फिरोजपुर सिविल अस्पताल में हमेशा जमा रहता है गंदा पानी, बच्चा वार्ड में खस्ताहाल है बाथरूम

Sun, 31 Jul 2022 01:18 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर/गुरदासपुर/पठानकोट

सार

शुक्रवार को सेहत मंत्री के फिरोजपुर सिविल अस्पताल में आने के कारण सड़क पर फैला सीवरेज का पानी साफ करवाया गया है, जबकि यह पानी यहां पर हमेशा जमा रहता है और बदबू करता है। सीवरेज की हौदियों के ढक्कन तक नहीं हैं।
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फिरोजपुर सिविल अस्पताल में खुला पड़ा सीवर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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फिरोजपुर सिविल अस्पताल में बने बच्चा वार्ड के शौचालय का बुरा हाल है, न तो सफाई है और पाइपें टूटी हुई है। अस्पताल का सीवरेज सिस्टम बहुत खराब है, पोस्टमार्टम वाली इमारत के नजदीक सीवरेज का पानी हमेशा खड़ा रहता है, जिससे मरीजों को आने जाने की परेशानी होती है। अस्पताल के प्रवेश स्थान पर दो गेट लगे हैं, एक ही गेट खुला रहता है जबकि दूसरे गेट के पास दुकानें बनी होने के कारण बंद ही रहता है। इसके अलावा नशा छुड़वाओ सेंटर को जाने वाला रास्ता जंगल में तबदील है, इसके पास बनी पुरानी इमारत में कई युवा नशे का इंजेक्शन लगाते देखे गए हैं।
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सिविल अस्पताल में कुछ वर्ष पूर्व ही बच्चा वार्ड की इमारत बनी है, जो जगह-जगह से टूटने लगी है। इसके शौचालय की हालत बहुत खस्ता है, पाइपें तक टूटी हैं। सफाई तक नहीं है। मजबूरन मरीज ऐसे शौचालय का इस्तेमाल कर रहे हैं। सर्जिकल वार्ड में लोगों ने अपने वाहन खड़े किए हैं। कोई भी डॉक्टर इन्हें मना नहीं करता है। वाहनों के धुएं से मरीजों को परेशानी होती है। पिछले लंबे समय से सिविल अस्पताल का सीवरेज सिस्टम सुधरने का नाम नहीं ले रहा। 

शुक्रवार को सेहत मंत्री के फिरोजपुर सिविल अस्पताल में आने के कारण सड़क पर फैला सीवरेज का पानी साफ करवाया गया है, जबकि यह पानी यहां पर हमेशा खड़ा रहता है और बदबू मारता है। सीवरेज की हौदियों के ढक्कन तक नहीं हैं। सिविल अस्पताल में नशा छुड़वाओ केंद्र बना है, उक्त केंद्र को जाने वाला रास्ता इन दिनों में जंगल बना हुआ है। इसके पास बने पुराने क्वार्टरों में नशेड़ियों को टीके लगाते हुए देखा जा सकता है। सिविल अस्पताल के मुख्य प्रवेश दरबार पर दो गेट लगे हैं, एक गेट वहां बनी दुकानें व आटो के खड़े होने के कारण बंद रहता है।
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खुद वेंटिलेटर पर सांसें ले रहा गुरदासपुर सिविल अस्पताल 

मरीजों को सांसें देकर जिंदा रखने वाला सिविल अस्पताल गुरदासपुर की इमारत बेशक बाहर से देखने में बेहद आकर्षित लगती हो, परंतु फंडों के अभाव के चलते अस्पताल इन दिनों खुद वेंटिलेटर पर है। किसी वक्त पंजाब में प्रथम स्थान हासिल कर पाने वाला सिविल अस्पताल गुरदासपुर आज मरीजों को न तो मुफ्त इलाज दे पाने में सक्षम है और न ही उन्हें मुफ्त में दवाएं। अस्पताल की नब्ज को चलाकर रखने वाला सरबत बीमा सेहत योजना में सरकार की ओर से फंडों की अदायगी न होने के चलते अब आम आदमी को मुफ्त का इलाज भी नहीं मिल पा रहा और उन्हें इलाज के लिए भारी भरकम रकम चुकानी पड़ रही है।  

शनिवार को सिविल अस्पताल गुरदासपुर का दौरा करने पर पाया गया कि आम आदमी के लिए सिविल अस्पताल महज एक निजी संस्थान बना दिख रहा था। अस्पताल में साफ सफाई ठीक ठीक थी परंतु टेस्ट तथा दवाओं के लिए आम आदमी को बाहर की दुकानों पर भारी भरकम मोटी रकम चुकानी पड़ रही थी। पिछले काफी समय से दवा की किट अस्पताल में आई ही नहीं।

बीमार व्यक्ति के परिजनों के पास सरबत सेहत बीमा योजना के कार्ड तो थे परंतु अस्पताल के पास मुफ्त में इलाज नहीं था। अस्पताल कर्मचारियों का कहना था कि सरकार पेमेंट न होने के चलते बीमा कंपनी वालों ने मंजूरी देनी बंद कर दी है। वहीं सरकारी लैब में खून की जांच करने वाली किट की कमी के चलते अस्पताल में किडनी, लीवर, इंफेक्शन के टेस्ट नहीं हो पा रहे थे। हालांकि अस्पताल के बाहर कुछ ही कदमों की दूरी पर कृष्णा लैब वाजिब रेट पर टेस्ट कर रही थी परंतु लोग अस्पताल में मुफ्त का इलाज करवाने आए थे, जो नहीं मिल पा रहा था। 

अपने परिजनों का बवासीर का आपरेशन करवाने आए रवि ने बताया कि अस्पताल में उसे सफाई को लेकर कोई दिक्कत पेश नहीं आई, परंतु आपरेशन करवाने के लिए उसे तीन हजार रुपये का सामान बाहर से खरीदना पड़ा तथा यहां तक की टेस्ट भी बाहर से करवाने पड़े। इसी तरह अमरीक सिंह ने बताया कि उन्हें स्टाफ की कोई गलती नहीं लगी क्योंकि अस्पताल में टेस्ट किट ही नहीं हैं तो वह क्या करें। स्टाफ का कहना था कि इस संबंधी अधिकारियों को लिखा जा चुका है। 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेशक वाहवाही बटोरने के लिए सब ठीक होने की बातें की जा रही हों, परंतु पता करने पर पाया गया कि सिविल अस्पताल में कोई भी रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड तथा डायलाइसिस की मशीन भी खराबी के चलते बंद पाई गई। वहीं हॉटलाइन होने के बावजूद पाया गया कि बिजली के कई-कई घंटों के कट लगते हैं। गुरदासपुर की एसएमओ डॉ. चेतना का कहना था कि दवाओं और किटों संबंधी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लिखा गया है तथा बहुत जल्द सरकार की ओर से सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी।  
 
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पठानकोट: लटकती तारें, एक्सपायर अग्निशमन यंत्र, आवारा कुत्तों समेत कई समस्याएं

बदइंतजामी के कारण आए दिन चर्चा में रहने वाला सिविल अस्पताल पठानकोट मरीजों की मुश्किलों का कारण बन रहा है। लगातार 2 साल प्रदेश में अव्व्ल रहे पठानकोट सिविल अस्पताल में कमियों की भरमार है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी वार्ड की दीवारों से पानी टपकता है, अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है। बिजली की तारें हादसे का कारण बन सकती हैं। यहां तक कि अग्निशमन यंत्र भी एक्सपायर हो चुके हैं। 

फंड की कमी से मरीजों को दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हुए करीब चार महीने हो गए हैं, लेकिन मशीन की रिपेयर अभी तक नहीं करवाई गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार फंड की कमी के चलते मशीन की रिपेयर नहीं करवाई जा सकी है। जानकारी के लिए बता दें कि सिविल के अल्ट्रासाउंड सेंटर में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड निशुल्क किए जाते हैं, जबकि अन्य मरीजों की 200 रुपये सरकारी फीस है, लेकिन 30 मार्च से खराब मशीन को 11 अप्रैल के बाद जब रिपेयर करवाया गया तब से मशीन से गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं।

23 जुलाई को कैबिनेट मंत्री ने किया उद्घाटन, अब लटके ताले

23 जुलाई को कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक ने सिविल अस्पताल में 15 एसी/नॉन एसी और 6 बेड के जनरल वार्ड का उद्घाटन किया था, लेकिन 7 दिन बाद भी डॉक्टरों व स्टाफ की कमी का हवाला देकर इमारत पर ताला लटकाया गया है। बता दें, उक्त इमारत का निर्माण पठानकोट की एक अग्रणी संस्था पठानकोट विकास मंच ने 80 लाख रुपये खर्च कर ट्रामा सेंटर के ऊपर बनाई नई इमारत में नए कमरों और जनरल वार्ड का उद्घाटन होने के बाद मरीजों की सुविधा हेतु सेहत विभाग के सुपुर्द कर दी थी, ताकि सिविल अस्पताल में आने वाले लोगों को इस इमारत में बने एसी कमरों की सुविधा मिल सकें। लोगों का कहना है कि कैबिनेट मंत्री से नई इमारत का उद्घाटन करवा महज दिखावा किया गया है। 150 बेड के जिला पठानकोट के सिविल अस्पताल में मौजूदा समय में 160 से अधिक मरीज भर्ती हैं। 150 बेड के अस्पताल में पहले से सिर्फ 4 प्राइवेट 4 कमरे ही हैं। इसलिए विकास मंच ने लोगों की सुविधा हेतु नए कमरे बनाकर दिए थे। मौजूदा समय में अस्पताल प्रबंधन द्वारा एक्सट्रा बेड लगाकर काम चलाया जा रहा है 

सिविल अस्पताल में कुछ स्टाफ की ट्रांसफर होने से डाक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते समस्या आ रही है। मौजूदा समय में सिविल में 40 स्टाफ नर्स हैं। नर्सिंग स्टाफ की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों ने सेहत विभाग को अवगत करवा दिया है।  - डॉ. सुनील चंद, कार्यकारी एसएमओ सिविल अस्पताल

अगर स्टाफ नहीं था तो उद्घाटन क्यों करवाया : नरेंद्र काला 

पठानकोट विकास मंच के चेयरमैन नरेंद्र काला का कहना है कि हमने सिविल में आने वाले मरीजों की सुविधा हेतु 2 वर्षों में इमारत में नए कमरे तैयार करवाकर अस्पताल प्रबंधन के हैं हैंडओवर कर दिए हैं। अगर सेहत विभाग के पास स्टाफ ही नहीं था तो इमारत का उद्घाटन क्यों करवाया? कमरों में मरीजों को भर्ती कर ट्रीटमेंट देने का सेहत विभाग का काम है। इसके लिए सरकार को नए स्टाफ की भर्ती करनी चाहिए।

सिविल अस्पताल में करीब 40 डॉक्टर तैनात हैं, जबकि 50 से अधिक डॉक्टरों की जरूरत है। वहीं सिविल अस्पताल में 100 से अधिक नर्सिंग स्टाफ की जरूरत है। मौजूदा समय में करीब 35-40 स्टाफ नर्सें ही कार्यरत हैं। सिविल में मौजूदा समय में एक गायनी स्पेशलिस्ट काम कर रही है। वहीं सड़क हादसे में जख्मी ईएनटी स्पेशलिस्ट डाक्टर मेडिकल लीव पर चल रहे हैं। वहीं दूसरा ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी मेडिकल लीव पर है। सिविल में एक ही मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टर काम कर रहा है और सिविल में स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही नहीं है। इस कारण अस्पताल प्रबंधन के लिए इन समस्याओं के बावजूद लोगों को सेहत सुविधाएं मुहैया करवाने को एक चुनौती चल रही है। 
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