फिरोजपुर की जिला उपभोक्ता अदालत ने नलबंदी आपरेशन के बाद महिला के गर्भवती होने के मामले में स्थानीय सिविल अस्पताल के डाक्टरों को आरोपी मानते हुए जुर्माना और हर्जाना अदा करने के आदेश दिए हैं।
गांव सप्पावाली निवासी मनोहर लाल की पत्नी सीमा ने 12 मई 2009 को स्थानीय सिविल अस्पताल में नलबंदी ऑपरेशन करवाया था। 19 मार्च 2013 को सीमा को पेट दर्द महसूस होने के बाद सिविल अस्पताल में लाया गया, लेकिन डाक्टरों ने उसे फरीदकोट के मेडिकल कॉलेज में रैफर कर दिया।
इसके बाद उसे शहर के ही एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती करवाया गया। यहां उसके गर्भवती होने का पता चला। एक जरूरी आपरेशन पर सीमा के परिजनों ने करीब 21 हजार रुपये खर्च कर दिए और 23 मार्च 2013 को सीमा को अस्पताल से छुट्टी दी गई।
मनोहर लाल ने स्थानीय सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पंजाब हेल्थ कार्पोरेशन के प्रबंध निर्देशक के खिलाफ जिला उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।
जिला उपभोक्ता अदालत ने सिविल अस्पताल को सेवाओं का आरोपी मानते हुए मनोहर लाल को सीमा के इलाज पर आया इक्कीस हजार रुपये का खर्च, सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीस हजार रुपये का मुआवजा, मानसिक परेशानी के बदले दस हजार रुपये का हर्जाना और कानूनी खर्च के तीन हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।