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गलघोटू बीमारी से दो बच्चों की मौत

Sat, 21 Sep 2013 11:10 PM IST
अमर उजाला अबोहर (फिरोजपुर)
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इस दौरान पूरे गांव में बच्चों का टीकाकरण करवाया गया। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम गांव में 24 घंटे नियुक्त कर दी गई है ताकि अन्य बच्चों की स्थिति पर नजर रखी जा सके।
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सिविल सर्जन डा. बलदेव राज ने बताया कि गलघोटू बीमारी से संदीप पुत्र पप्पू राम की मौत के बाद डाक्टरों ने गले में दर्द से पीड़ित अजय पुत्र कृष्ण लाल, पवनदीप पुत्र सुखमिंद्र सिंह को पीजीआई दाखिल करवाया। शुक्रवार रात्रि पवनदीप की मौत हो गई।
गांव में लगातार दो बच्चों की मौत की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव पहुंची और घर-घर जाकर बच्चों को टीके लगाने शुरू कर दिए।
सिविल सर्जन ने बताया कि शनिवार को जांच में मृतक बच्चे संदीप की दो बहनों वीरपाल कौर व परमजीत कौर एक भाई  गौरव कुमार सहित एक अन्य लड़की सोनी पुत्री सुरजाराम में गलघोटू के लक्षण पाए गए हैं। इन चारों को भी उपचार के लिए चंडीगढ़ भेजा गया।
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 इस संबंध में एसएमओ डॉ. कंवरजीत सिंह धालीवाल ने बताया कि पूरे गांव के बच्चों में टीकाकरण करवा दिया गया है और ग्रामीणों को बीमारी के प्रति सचेत कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि गलघोटू एक छुआछूत की बीमारी है और बच्चों द्वारा आपस में बातचीत करने या एक दूसरे के साथ खेलने के दौरान सांस आदि के माध्यम से फैलती है।
 उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे के गले में दर्द या सूजन आदि महसूस हो तो उसे तुरंत ही सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया जाए। उन्होंने कहा कि अगर बीमारी का तुरंत पता चल जाए तो इलाज पूरी तरह से संभव है।
धालीवाल ने बताया कि विभाग की मेडिकल टीम गांव में नियुक्त कर दी गई है जो पूरे गांव के बच्चों की स्थित पर नजर रखे हुए हैं। सिविल सर्जन डॉ. बलदेव राज ने मृतक बच्चों के परिजनाें को सरकारी सहायता की सिफारिश भी की है। वहीं पूरे गांव के लोगों में इस बीमारी को लेकर भय पाया जा रहा है।
गलघोटू की बीमारी का शिकार हुए संदीप पुत्र पप्पूराम के बारे में एसएमओ धालीवाल ने बताया कि पूरे परिवार से हुई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इन्हाेंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए जाने वाले गलघोटू सहित 6 घातक बीमारियाें के टीके अपने बच्चाें को नहीं लगवाए। संभवत: इसी कारण यह घटना सामने आई है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बच्चों को खसरा, चेचक, काली खांसी, गलघोटू तथा पोलियो आदि से निपटने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।  लेकिन ग्रामीण स्तर पर कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें लोग अपने बच्चों को यह टीके नहीं लगवाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अपने बच्चों को इन घातक बीमारियाें से बचाव के टीके अवश्य लगवाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने बताया कि यह बीमारी अक्सर 10 से 12 वर्ष तक के बच्चों में अधिक फैलती है।
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