तीन दिन पहले गांव सरावां में उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल का विरोध करने के आरोप में 10 ग्रामीणों को गिरफ्तार करने का बहिबल गोलीकांड में शहीद गुरजीत सिंह के परिवार ने कड़ा ऐतराज जताया है। इस मामले को लेकर शहीद परिवार ने शुक्रवार को जिला प्रशासन से मुलाकात करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जेल भेजे गए इन ग्रामीणों को 21 नवंबर को सुबह 11 बजे तक रिहा न किया गया तो शहीद गुरजीत सिंह के फूफा कर्म सिंह योगी व उनकी पत्नी की तरफ से डीसी दफ्तर के बाहर आत्मदाह किया जाएगा।
डिप्टी कमिश्नर मालविंदर सिंह जग्गी से मिलने पहुंचे शहीद गुरजीत सिंह के पिता साधू सिंह समेत अन्य पारिवारिक सदस्यों ने अवगत करवाया कि डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल बीती 17 नवंबर को उनके आवास पर अफसोस जताने पहुंचे थे।
इस दौरान पुलिस ने डिप्टी सीएम का विरोध करने के आरोप में गांव सरावां समेत कुछ अन्य गांवों से संबंधित 10 नौजवानों को हिरासत में लिया और उनके खिलाफ शांति भंग करने का केस दर्ज करके उन्हें जेल दिया।
शहीद परिवार के अनुसार जब उनके बेटे की पुलिस ने हत्या की थी तो इन्हीं लोगों ने परिवार का साथ दिया था और अब पुलिस की इस कार्रवाई से उनके परिवार व गांव में तनाव का माहौल पैदा हो गया है।
पुलिस के इस कदम से खुद को शर्मसार महसूस करते हुए शहीद गुरजीत सिंह के फूफा व भुआ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इन ग्रामीणों को 21 नवंबर 11 बजे तक रिहा न किया तो वे डीसी दफ्तर के बाहर पांच वाणी का पाठ करने के उपरांत आत्मदाह कर लेगें।
उधर, डिप्टी कमिश्नर दफ्तर में अपना पक्ष रखने आए परिवार की जिला परिषद के चेयरमैन व सीपीएस मनतार सिंह बराड़ के छोटे भाई कुलतार सिंह बराड़ के साथ बहस हो गई। पीड़ित परिवार व हाजिर लोगों ने डिप्टी कमिश्नर के सामने ही चेयरमैन को खरी खरी सुनाते हुए कहा कि शिअद नेताओं ने अपनी छवि को चमकाने और उपमुख्यमंत्री को खुश करने के लिए पुलिस व लोगों के साथ धक्केशाही करवाई है।
इस मामले में डीसी मालविंदर सिंह जग्गी ने कहा कि जिला प्रशासन ने गिरफ्तार ग्रामीणों के परिजनों को एसडीएम के पास जमानत भरने को कहा है और जमानत भरते ही उन्हें तुरंत रिहा कर किया जाएगा। डीसी के अनुसार प्रभावित लोगों ने यह प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही उनकी रिहाई हो जाएगी।