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तलवारें लेकर बाजार बंद करवाया, शराब ठेका लूटकर लगाई आग

Wed, 23 Dec 2015 02:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
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अबोहर के बहुचर्चित गैंगवार में मारे गए भीम टांक मामले की सीबीआई जांच शुरू करवाने की मांग को लेकर मंगलवार को पंजाब बंद करवाया गया। इस दौरान अबोहर में कुछ असामाजिक तत्वों ने जमकर तोड़फोड़ करते हुए गुंडागर्दी दिखाई और समीपवर्ती गांव रामसरा के पास एक शराब का ठेका लूटकर उसमें आग लगा दी, जबकि शहर के एक सांध्य दैनिक समाचार पत्र कार्यालय के शीशे तोड़ दिए।
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इसके अलावा कई अन्य स्थानों पर मरीज देख रहे डाक्टरों से भी दुर्व्यवहार किया गया। इस दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मूक दर्शक बना रहा। उधर, फिरोजपुर में शहर और छावनी का बाजार बंद करवाया गया। यही नहीं कई लोगों के पास नंगी तलवारें थी। उसके बाद शहर और छावनी को जोड़ने वाले पुल पर बैठ कर धरना दिया। इस कारण यातायात काफी देर तक प्रभावित हुआ।

भीम टांक हत्याकांड संघर्ष कमेटी ने सोमवार को ही बाजारों में सूचना सार्वजनिक करवाकर मंगलवार को मुकम्मल पंजाब बंद की घोषणा की थी। सुबह होते ही जब कुछ दुकानदारों ने आंशिक रूप से अपनी दुकानें खोलीं तो एक भीड़ के रूप में आए लोगों में दुकानें पूरी तरह से बंद करवा दीं।
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इसके बाद सर्कुलर रोड पर गंभीर हालत में एक मरीज का उपचार कर रहे डाक्टर सोमानी को भी डरा-धमका कर उनका क्लीनिक बंद करवा दिया। देखते ही देखते यह भीड़ भी कई ग्रुप में बिखर गई तथा कृष्णा नगरी रोड पर स्थित सांध्य दैनिक का कार्यालय के गेट का शीशा तोड़ दिया।

इसी दौरान कुछ लोगों ने गांव रामसरा के शराब ठेके पर कब्जा कर लिया तथा ठेका कर्मचारी से मारपीट कर वहां से शराब लूट ली व खाली गत्तों में आग लगा दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची तथा आग पर काबू पाया।

बंद के दौरान संघर्ष कमेटी के सदस्यों ने बस स्टैंड पर दो घंटे तक जाम लगाया तथा भीम टांक मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। बंद के दौरान डीआईजी अमर सिंह चहल, डीएसपी वीरचंद, डीएसपी गुरभेज सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल शहर में मौजूद रहा।
 
पंजाब बंद के दौरान अबोहर के निजी स्कूल कालेजों ने सोमवार को ही मंगलवार की छुट्टी का ऐलान कर दिया था, लेकिन कुछ सरकारी स्कूलों ने बंद के दौरान छुट्टी कर दी। इससे बच्चों के परिजनों में भारी रोष पाया गया।

लोगों का कहना था कि एक ओर जहां कुछ असामाजिक तत्व शहर में तोड़फोड़ तथा मारपीट कर रहे हैं ऐसे में सरकारी स्कूल के सैकड़ों बच्चों को सुनसान सड़कों पर छोड़ना किसी खतरे से खाली नहीं है। अभिभावकों का कहना था कि सरकारी स्कूलों को भी कल ही छुट्टी का ऐलान करना चाहिए था।
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