राज्य की मानवाधिकार संस्थाओं ने बरगाड़ी बेअदबी मामले को लेकर 14 अक्तूबर, 2015 को गांव बहिबल कलां में सिख जत्थेबंदियों के रोष धरने पर पुलिस फायरिंग मामले की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवामुक्त जस्टिस मार्कंडेय काटजू की अध्यक्षता में गैर सरकारी न्यायिक आयोग का गठन किया है।
शनिवार को आयोग के चेयरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने इस मामले की जांच शुरू करते हुए गांव बहिबल कलां में घटनास्थल का जायजा लिया। इस दौरान जस्टिस काटजू ने घटना के प्रत्यक्षदर्शियों से पूरे मामले की जानकारी जुटाई। अगले चरण में आयोग की तरफ से 31 जनवरी व 1 फरवरी को गांव के गुरुद्वारा साहिब में पब्लिक मीटिंग करके गोलीकांड में मारे गए दोनों सिख नौजवानों के परिवारों समेत घायलों व गवाहों के बयान दर्ज करके घटना के तथ्य जुटाए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार 12 अक्तूबर 2015 को गांव बरगाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी का मामला सामने आया था। बेअदबी मामले को लेकर पूरे क्षेत्र में सिख जत्थेबंदियों ने जगह जगह रोष प्रदर्शन शुरू कर दिए थे।
14 अक्तूबर को बरगाड़ी से सटे गांव बहिबल कलां में चल रहे रोष धरने को उठवाने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी थी। इसमें गांव सरावां के गुरजीत सिंह व गांव नियामीवाला के किशन भगवान सिंह की मौत हो गई थी, जबकि काफी तादाद में लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
इस घटना को लेकर राज्य भर में चौतरफा विरोध के बाद पंजाब सरकार के आदेश पर जिला पुलिस ने थाना बाजाखाना में अज्ञात पुलिस पार्टी के खिलाफ हत्या का केस भी दर्ज किया लेकिन अभी तक किसी आरोपी को पकड़ा नहीं गया।
साथ ही राज्य सरकार की तरफ से हाईकोर्ट के सेवामुक्त जस्टिस जोरा सिंह की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग से इस घटना की जांच करवा रही है। यह जांच भी काफी थीमी रफ्तार से चल रही है और पंजाब के मानवाधिकार संगठनों को इन दोनों जांच प्रक्रियाओं से किसी तरह की उम्मीद नजर नहीं आ रही।
ऐसे में सिख वार ह्यूमन राइट्स, लायरस वार ह्यूमन राइट्स व पंजाब मानवाधिकार संस्था ने पिछले माह बहिबल गोलीकांड की जांच के लिए जस्टिस मार्कंडेय काटजू की अध्यक्षता में पीपुल्स आयोग का गठन किया था और इसमें सचिव के तौर पर राज्य के पूर्व डीडीपी (जेल) शशिकांत को शामिल किया गया है। शनिवार बाद दोपहर गांव बहिबल कलां में पहुंचे जस्टिस काटजू ने घटना स्थल का जायजा लिया और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों से पूरे मामले की जानकारी ली।
बहिबल गोलीकांड के घटनास्थल का जायजा लेने के बाद जस्टिस काटजू ने कहा कि वह इस घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच कर रहे हैं। अगले दो दिनों के दौरान पीड़ित परिवारों व गवाहों से बातचीत के आधार पर घटना से जुड़े तमाम तथ्य जुटाने की कोशिश की जाएगी।
आयोग अपनी जांच में यह भी सामने लाने की कोशिश करेगा कि आखिरकार पुलिस को गोली चलाने की नौबत क्यों आई। पुलिस ने गोली चलाने से पहले लोगों को चेतावनी दी थी या नहीं और पुलिस को निहत्थे लोगों को गोली चलाने की इजाजत किसने दी।
उन्होंने बताया कि 31 जनवरी व 1 फरवरी की मीटिंगों के बारे में जिला फरीदकोट के सिविल व पुलिस प्रशासन को भी लिखित रूप से जानकारी भेज दी है और उन्हें अपना पक्ष रखने का आग्रह किया गया है।
घटना की मुकम्मल जांच के आयोग अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा और उसके आधार पर भले ही सरकार कार्रवाई करे या फिर लोग अदालत में जनहित याचिका दायर करे।