दालों की बढ़ती कीमत की वजह से सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत सरकारी व एडेड स्कूलों में चल रही मिड-डे-मील स्कीम दम तोड़ती नजर आ रही है। बच्चों को पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा है।
सरकार ने प्रति बच्चे को रोजाना पांच रुपये 64 पैसे के हिसाब से भोजन देना तय किया है, लेकिन जिस तरह दाल के दामों में तेजी आई है उसे देखते हुए कई स्कूलों में तो मिड-डे-मील बन भी नहीं रहा है। जिन स्कूलों में बन रहा है, उनकी थाली में से दाल गायब है।
यह हाल पूरे पंजाब के सरकारी और एडेड स्कूलों का है। पंजाब भर के सरकारी और एडेड स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक लगभग साढ़े चार लाख बच्चे पढ़ते हैं।
सरकारी स्कूल के एक प्रिंसिपल ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि जब से दालों के दामों में बढ़ोतरी हुई है, मिड-डे-मील के तहत स्कूलों में बच्चों को दिया जाने वाले भोजन में से दाल गायब है।
इतने कम पैसों में बच्चों को दाल देना बहुत मुश्किल हो चुका है। जिस स्कूल में 30 बच्चे हैं और प्रत्येक बच्चे को पांच रुपये 64 पैसे के हिसाब से भोजन देना है, कुल धनराशि 169 रुपये बीस पैसे बनती है। इतने रुपये में बच्चों को अरहर, मूंग, राजमा, चने की दाल-चावल या रोटी खिलाना बहुत मुश्किल है।
अरहर की दाल का दाम 220 रुपये किलो है। जबकि कुल धनराशि में से ही दाल, घी व अन्य मसाला आदि एकत्र करना भी मुश्किल हो गया है। प्याज के दामों में भी काफी तेजी आई हुई है।
मैन्यू के मुतािबिक सप्ताह में तीन दिन दाल-चावल, दाल रोटी व चावल में दाल डालकर खिचड़ी देनी है। इसके अलावा रोटी-सब्जी, खीर, एक दिन चावल-कढ़ी और कढ़ी में प्याज वाले पकोड़ी डालनी जरूरी है।