बारिश न होने से सीमावर्ती क्षेत्र में भयंकर सूखे के आसार दिखाई देने लगे हैं। मानसून के दस्तक देने के बावजूद अब तक सिर्फ एक ही बार बारिश हुई है। जिसके बाद लगातार पड़ रही भयंकर गर्मी के कारण किसानों की फसलें सूख रही है।
गांव शेरगढ़ के किसान भरत भादू और देवेन्द्र का कहना है कि टेलों पर बसे होने के कारण उन्हें कभी नहरी पानी पूरा नहीं मिलता। वे बरसात के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। इस बार उनकी फसलें और बाग सूखे की चपेट में आ गए हैं। गांव के किसानों महावीर भादू, भरत भादू, देवेन्द्र भादू, अमित भादू, धर्मपाल, हंसराज, मोतीराम और सुरजीत ने बताया कि उनके गांव में खेतों की सिंचाई के लिए जो टेल (नहर) आती है, उसमें पूरा पानी नहीं पहुंच पाता जिस कारण उनके नरमे की फसल और बागाें की सिंचाई का अधिकतर हिस्सा बरसाती पानी से ही पूरा होता है। लेकिन इस बार बरसात न होने से उनकी फसलें और बाग सूख रहे हैं।
उन्हाेंने बताया कि ऐसे में अगर नहरी विभाग उन्हें पूरा पानी उपलब्ध करवाए तो नष्ट हो रही फसलों का कुछ प्रतिशत हिस्सा बचाया जा सकता है। इन किसानों ने कहा है कि इस मांग को लेकर वे शीघ्र ही सांसद शेर सिंह घुबाया से मुलाकात करेंगे। किसानों के अनुसार उनके सैकड़ों एकड़ बाग समय पर पानी न मिलने के कारण पूरी तरह से सूख रहे हैं वहीं नरमे की फसल भी पूरी तरह से झुलस गई है।
भूजल स्तर भी गिरा
मौसम विभाग के अनुसार पिछले कुछ साल से प्रदेश में सामान्य से 50 से 70 फीसदी तक वर्षा कम होने से भूजल स्तर भी नीचे चला गया है जिससे ट्यूबवेल भी पानी नहीं खींच पा रहे।
धान की रोपाई के कारण नहीं मिल रहा पानी
राजस्थान के साथ लगती पंजाब की सीमा को जाने वाली नहराें के आसपास हजारों एकड़ भूमि में धान की रोपाई हो चुकी है जिससे वहां पर नहरी पानी की अधिक खपत हो रही है। इसीलिए टेलों पर पूरा पानी नहीं पहुंच रहा।
डीजल इंजनों से बढ़ रही उत्पादन लागत
साथ ही पंजाब में बिजली की कमी के चलते पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए किसानों को डीजल इंजनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे फसल की उत्पादन लागत में भारी बढ़ोत्तरी होती है और मंडियों में फसलों के पूरे दाम न मिलने के कारण किसान आर्थिक बोझ तले दब जाता है। टेलों के किसानों ने नहरी विभाग से मांग की है कि नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए।