पंजाब के खुफिया विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर मंगलवार को उस समय प्रश्न चिह्न लग गया जब मालेरकोटला के साथ सटे कस्बा अहमदगढ़ की पुलिस ने खुफिया विभाग के एक सब-इंस्पेक्टर को तीन साल की जांच के बाद गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने इस अधिकारी का अदालत से तीन दिन का पुलिस रिमांड भी हासिल कर लिया है। सब इंस्पेक्टर पर आरोप हैं कि उसने 16 अप्रैल, 2011 को मालेरकोटला के गांव जलवाना में एक एनआरआई लखविंदर सिंह के घर पर छापामारी की थी। उनके घर से 57 लाख 89 हजार 755 रुपये की नकदी बरामद करके इस मामले को सनसनीखेज बताकर नकदी को हवाला राशि का नाम दिया गया था।
विभाग की वाहवाही लूटने और प्रमोशन के चक्कर में काउंटर इंटेलिजेंस विभाग की इस टीम ने नकदी जब्त कर मामला ईडी विभाग को सौंप दिया था।
इस टीम का नेतृत्व सब इंस्पेक्टर स्वर्ण कुमार गांधी कर रहे थे। इस संगीन मामले में आरोपी बनाए गए एनआरआई लखविंदर सिंह ने काउंटर इंटेलिजेंस की इस छापामारी को झूठा बताकर इसकी शिकायत पंजाब एनआरआई विंग को की थी। बताया कि उन्होंने लुधियाना स्थित अपनी कोठी को बेचा था जिसकी रकम करीब 58 लाख रुपये उन्होंने अपने घर रखे थे कि विभाग ने छापामारी करके इसे हवाला राशि के साथ जोड़ दिया।
यह भी आरोप लगाया गया कि छापामारी टीम ने तलाशी के दौरान 2 लाख 92 हजार रुपये, चार महंगे मोबाइल फोन, डायमंड रिंग और एक सोने की अंगूठी को खुर्दबुर्द कर दिया है। जांच के बाद सोमवार देर रात अहमदगढ़ पुलिस थाने में सब इंस्पेक्टर स्वर्ण कुमार गांधी के खिलाफ चोरी करने, घर में जबरी घुसकर हमला करने और जान से मार देने की धमकियां देने का मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
मामले की जांच कर रहे पुलिस इंस्पेक्टर हरविंदर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस दौरान बताया कि उन्हें आरोपी सब इंस्पेक्टर का अदालत से तीन दिन का पुलिस रिमांड मिल गया है। इन दिनों सब इंस्पेक्टर स्वर्ण कुमार गांधी पीएपी जालंधर में तैनात है। आरोपी सब इंस्पेक्टर स्वर्ण कुमार गांधी ने पुलिस थाने में पत्रकारों को बताया कि उनपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।