रेल पटरी पर तेज रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों के लिए धुंध तमाम मुश्किलें खड़ी कर रही है।
ट्रेन चालकों को आदेश दिए गए हैं कि कोहरे की सघनता को देखकर ट्रेन की रफ्तार साठ किलोमीटर प्रति घंटा चलाएं ताकि कोई बड़ा रेल हादसा न हो सके। धुंध में ट्रेनों को चलाने के लिए फॉग पटाखों की मदद ली जा रही है, ताकि चालक को सिग्नल संबंधी जानकारी मिल सके।
सेफ्टी विभाग से संबंधित एक अधिकारी ने बताया कि सर्दी में जैसे ही धुंध अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर देती है, तो सभी चालकों को धीमी गति में ट्रेन चलाने के आदेश दे दिए जाते हैं। सिग्नल क्षेत्र में ट्रेन की अधिकतम रफ्तार तीस किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। यदि धुंध अधिक पड़ रही है तो चालक ट्रेन की रफ्तार अपनी मर्जी से कम भी कर सकता है ऐसा यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किया है।
ट्रैक की देख-रेख कर रहे गैंगमैनों को आदेश दिए हैं कि कोहरे के समय इनर-डिस्टेंट सिग्नल से 270 मीटर पहले फॉग पटाखे अवश्य लगे होने चाहिए। यदि किसी चालक को अंकित किए गए प्वाइंटों पर फॉग पटाखे लगे हुए नहीं मिले तो वह संबंधित अधिकारी को सूचित करेंगे।
घनी धुंध और ठंड के कारण कई बार ट्रैक अचानक टूट जाता है। ऐसी स्थिति में रेल हादसा होने का भय रहता है इसीलिए गैंगमैन ट्रैक के साथ-साथ गश्त के दौरान ट्रैक को देखता रहा है। जहां भी उसे ऐसे लगे वह नजदीक के स्टेशन मास्टर को सूचित करता है। धुंध में ट्रेन चलाने का एक सहारा फॉग पटाखे हैं क्योंकि खुले इलाके में धुंध सबसे अधिक पड़ती है।