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चार पुलिस कर्मचारियों को उम्रकैद व जुर्माना

Tue, 24 Dec 2013 10:59 PM IST
अमर उजाला, अबोहर
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भवानी कॉटन मिल में 1991 में हुए गोलीकांड के मामले में 22 वर्षों के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएस महरोक की अदालत ने चार पुलिस कर्मचारियों और 8 लोगों की हत्या का दोषी मानते हुए उन्हें उम्रकैद व जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
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पुलिस कर्मचारियों में नरेंद्र पाल सिंह, हरचरण सिंह, हरदेव सिंह और प्यारा सिंह का नाम शामिल है। प्यारा सिंह को छोड़ कर शेष तीन पुलिस कर्मी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसी मामले से संबंधित मुद्दई पक्ष में मजदूर यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष राम अवतार, प्रमोद कुमार, बंगाली बाबू और मास्टर उत्तम चंद को तीन साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने का फैसला सुनाया।

ज्ञात हो कि अबोहर के श्री भवानी कॉटन मिल में 25 अक्टूबर 1991 को मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर धरना लगाया हुआ था। इसी दौरान पुलिस और मजदूरों के बीच झड़प हुई और पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गई थी जबकि करीब डेढ़ दर्जन लोग घायल हो गए थे। इस बहु चर्चित गोलीकांड संबंधी मामला अबोहर सिटी-1 में 25 अक्टूबर 1991 को दर्ज हुआ था। इसमें पुलिस की ओर से तत्कालीन एएसआई नरेंद्र पाल सिंह ने तत्कालीन थाना प्रभारी गुरबाज सिंह को दिए बयानों में कहा था कि वह पुलिस पार्टी समेत भवानी कॉटन मिल के पास ड्यूटी पर तैनात था।
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 इसी दौरान मजदूर नेता राम अवतार, उत्तम चंद, प्रमोद, बराड़, तथा बंगाली बाबू इत्यादि मजदूरों से कह रहे थे कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे मिल को आग लगा देंगे। इतना सुनते ही मजदूरों का हुजूम उनकी तरफ बढ़ा और सिपाही कुलदीप सिंह, होमगार्ड  जवान नंद किशोर और कालाराम को बंधक बना लिया। पुलिस ने नायब तहसीलदार के आदेश पर आंसू गैस, लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की। लेकिन हुजूम पुलिस पर टूट पड़ा। मजबूरन पुलिस ने गोलियां चलानी पड़ी जिसमें कई लोग जख्मी हुए।

पुलिस ने नरिंदर पाल सिंह के बयानों पर उत्तम चंद, राम अवतार, शांति स्वरूप, जरनैल सिंह बराड़ तथा प्रमोद कुमार के मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में बंगाली बाबू का नाम और शामिल कर लिया गया, वहीं शांति स्वरूप तथा जरनैल सिंह बराड़ की मृत्यु के बाद इनका नाम मामले से निकाल दिया गया।   
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