एडिशनल जिला एवं सेशन जज की अदालत में ऑर्बिट बस कांड की मुख्य गवाह और
मृतक नाबालिग लड़की की मां छिंदर कौर पुलिस को दिए अपने बयानों से पलट गई।
साथ
ही वे अदालत में मौजूद आरोपियों को भी पहचान नहीं सकी। सरकारी पक्ष ने इन
बयानों को मुकरा करार दिया है। इस मामले में अदालत की ओर से 25 मार्च अगली
सुनवाई तय की गई है। एडिशनल जिला एवं सेशन जज गुरजंट सिंह की अदालत में
मृतक लड़की अर्शदीप कौर की मां छिंदर कौर ने अपने बयान दर्ज करवाए।
उससे
करीब एक घंटे सरकारी एवं बचाव पक्ष के वकीलों ने सवाल पूछे। सरकारी पक्ष
के मुताबिक उसने बस में टिकट को लेकर झगड़ा होने के बाद बेहोश होने की बात
कही है। उसे यह भी पता नहीं कि उसने छलांग मारी है या धक्का दिया गया था।
उन्हाेंने बताया कि वह न तो पुलिस को दिए बयान घटना एवं तारीख आदि की पूरी
तरह ताईद नहीं कर सकी और न ही अदालत में मौजूद आरोपियों को पहचान सकी।
सरकारी पक्ष के मुताबिक इन बयानों को मुकरा करार दिया गया है।
इस
मौके पर महिला के पति सुखदेव सिंह भी अदालत में मौजूद थे। सुखदेव सिंह भी
11 दिसंबर को अदालत में पुलिस को दिए अपने बयानों से मुकर गए थे। उनके
नाबालिग बेटे अकाशदीप सिंह का पेपर होने के कारण उनकी गवाही नहीं हो सकी।
इस मामले में अदालत ने अगली सुनवाई 25 मार्च तय की है।
बादल परिवार
की मालकी वाली बस कंपनी ऑर्बिट में बीते साल की 29 अप्रैल शाम को नाबालिग
लड़की अर्शदीप कौर से छेड़छाड़ के बाद चलती बस में से कथित तौर पर फेंक कर
मारने का आरोप है। इस मामले में महिला छिंदर कौर के बयानों पर थाना
बाघापुराना पुलिस ने 30 अप्रैल को आरोपियों रणजीत सिंह निवासी बठिंडा,
सुखविंदर सिंह उर्फ पंमा निवासी बहावल वाली थाना अबोहर जिला फाजिल्का,
गुरदीप सिंह उर्फ जिम्मी निवासी दश्मेश नगर मोगा और अमर राज दाना निवासी चक
बखतू जिला बठिंडा के खिलाफ केस दर्ज किया था।
पीड़ित महिला ने
पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि उन्हें 100 रुपये में एक टिकट दी
गई थी। यह झगड़ा होने के बाद उनकी बेटी के साथ आरोपियों ने कथित छेड़छाड़
के बाद उसे चलती बस में से कथित तौर पर नीचे फेंक दिया और उनकी बेटी की मौत
हो गई थी और उसे गंभीर चोटें लगीं थीं। इस घटना के समय मृतक लड़की अर्शदीप
का नाबालिग भाई अकाशदीप भी साथ था, जिसकी अब 25 मार्च को गवाही होनी है।