कृषि मंत्री जत्थेदार तोता सिंह ने शनिवार को कहा कि अब कृषि ग्रेजुएट को ही खाद और कीटनाशक का लाइसेंस दिया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने नकली खाद एवं कीटनाशक दवाओं का कारोबार रोकने के मकसद से केंद्र सरकार से फर्टिलाइजर कंट्रोल आर्डर 1985 और इंसेक्टीसाइड्स एक्ट में संशोधन करा दिया है।
साथ ही गलत डीलरों एवं दुकानदारों के लाइसेंस खत्म करने का फैसला किया गया है। कृषि मंत्री यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे।
कृषि मंत्री जत्थेदार तोता सिंह ने बताया कि पीली कुंगी रोग के हमले को रोकने के लिए ब्लाक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कृषि अधिकारियों की टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें खेतों की मिट्टी और पानी में डाले जाते तत्वों की कमी को पूरा करने और जरूरत अनुसार यूरिया की सही मात्रा और सही फसल बीजने के लिए किसानों को जागरूक करेंगी।
उन्होंने बताया कि खाद एवं कीटनाशक दवाओं का नमूना फेल होने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर के अलावा लाइसेंस रद्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से फर्टिलाइजर कंट्रोल आर्डर 1985 और इंसेक्टीसाइड्स एक्ट में संशोधन करा दिया गया।
अब खेतीबाड़ी ग्रेजुएट व्यक्ति को ही खाद एवं कीटनाशक दवाओं का लाइसेंस मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि पुराने लाइसेंसों की भी जांच पड़ताल की जा रही है और गलत डीलरों एवं दुकानदारों के लाइसेंस भी खत्म करन का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि तकरीबन एक लाख से अधिक किसानों को भूमि सेहत कार्ड जारी किये गए हैं। इस कार्ड पर किसान अपने खेतों की मिट्टी और पानी की परख करवा सकेंगे।
उधर, जिले के मुख्य कृषि अफसर डॉ. सुखदेव सिंह बराड़ के नेतृत्व में खेती माहिरों की सर्विलांस टीम की तरफ से गेहूं पर पीली कुंगी रोग रोकने के लिए कृषि विभाग के आधिकारियों ने अलग अलग गांवों का दौरा कर गेहूं की फसल का जायजा लिया। उन्होंने दावा किया कि मोगा जिले में गेहूं की फसल पर पीली कुंगी रोग के हमले का मामला किसी खेत में सामने नहीं आया।
डॉ. जसविंदर सिंह बराड़ ने किसानों से कहा है कि गेहूं के खेत में जिंक की पूर्ति के लिए एक किलो जिंक सल्फेट और आधा किलो चूना के पानी का प्रति एकड और मैगनीज की कमी पूरी करने के लिए एक किलो मैगनीज सल्फेट प्रति एकड़ की स्प्रे फसल पर स्प्रे करें।
खेती माहिर डॉ. कुलदीप सिंह बुट्टर ने कहा कि अगर किसी किस्म की बीमारी या तत्वों की कमी नजर आती है तो कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र के माहिरों से संपर्क करे। उन्हाेंने किसानों को सिफारिश दवाएं और खादों का प्रयोग करने की सलाह दी।