बरगाड़ी में पावन ग्रंथ की बेअदबी के मामले व बहिबल गोलीकांड समेत अन्य घटनाओं की न्यायिक जांच शुरू करने फरीदकोट पहुंचे जस्टिस जोरा सिंह आयोग के पास पिछले दो दिन के दौरान एक भी प्रभावित व्यक्ति ने शपथ पत्र दाखिल नहीं करवाया।
एक दिन पहले वीरवार को इन घटनाओं की जगह का जायजा लेने के बाद जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने शुक्रवार को यहां के सर्किट हाउस में बैठकर पीड़ित लोगों से मिलने की योजना बनाई थी। दिन भर इंतजार के बावजूद बहिबल गोलीकांड में शहीद हुए दोनों सिख नौजवानों के परिवारों समेत कोई भी प्रभावित व्यक्ति आयोग से मिलने नहीं आया।
पिछले दो दिन के दौरान फिलहाल आयोग के पास एक भी शपथ पत्र दाखिल नहीं हुआ और शनिवार से आयोग चंडीगढ़ स्थित अपने कार्यालय में जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
राज्य सरकार ने करीब दो माह पहले बरगाड़ी कांड व इससे जुड़ी तमाम घटनाओं की न्यायिक जांच के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के सेवामुक्त जस्टिस जोरा सिंह की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था।
एक दिन पहले वीरवार को न्यायिक जांच का काम शुरू करते हुए जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने इस मामले से जुड़ी तमाम घटनास्थलों गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला, बरगाड़ी, बहिबल व कोटकपूरा का जायजा लिया था। इस दौरान वे बहिबल गोलीकांड में घायल हुए अंगरेज सिंह से मिले था और एक अन्य घायल बेअंत सिंह के अलावा गोलीकांड में शहीद हुए गुरजीत सिंह सरावां के घरों पर भी गए थे।
उन्होंने पीड़ित परिवारों से आयोग के पास शिकायत सौंपने की अपील की थी और शुक्रवार को फरीदकोट में उपलब्ध रहने की जानकारी भी दी थी। जानकारी मिलने के बावजूद पीड़ित परिवार आयोग के सामने पेश होने नहीं आए।
बहिबल गोलीकांड में शहीद हुए गांव नियामीवाला के किशन भगवान सिंह के बेटे प्रभदीप सिंह ने रोष जताया कि वीरवार को जस्टिस जोरा सिंह आयोग की टीम उनके गांव आई थी।
इस घटना में घायल बेअंत सिंह के परिवार से मिली थी लेकिन गांव में आने के बावजूद वे उनसे मिलने नहीं आए। उनके पास आयोग के फरीदकोट में बैठने के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी और इसी वजह से वह उनके मिलने नहीं गए।
इस मामले में आयोग के प्रमुख जस्टिस जोरा सिंह ने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच की जा रही है। इसमें कोई भी व्यक्ति घटना के बारे में आयोग के पास अपना बयान दर्ज करवा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई आज उनके पास नहीं आ सका तो वह चंडीगढ़ में आयोग के कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
जस्टिस जोरा सिंह आयोग के पास भले ही पीड़ित परिवार मिलने नहीं आए, लेकिन सिख जत्थेबंदियों के पदाधिकारियों समेत गांव बहिबल के कुछ लोग जरूर उनसे मुलाकात करने पहुंचे।
सिख जत्थेबंदियों की अगुवाई कर रहे शिअद (अ) के जिलाध्यक्ष सुरजीत सिंह अराईयांवाला ने जस्टिस जोरा सिंह आयोग के पास गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला से पावन ग्रंथ का स्वरूप चोरी होने की घटना से लेकर वर्तमान समय तक के हालातों के बारे में एक लिखित ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने अवगत करवाया कि गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला की घटना के संदर्भ में जत्थेबंदियों की एक टीम ने पूरे मामले की गहन जांच की थी और कुछ लोगों पर शक जताया था। पुलिस ने उन लोगों के साथ सख्ती से पूछताछ नहीं की और उसके बाद मामले बढ़ता ही चला गया।
जत्थेबंदियों ने आयोग के पास सरबत खालसा के मामले में गिरफ्तार सिख 22 नेताओं के हस्ताक्षरों वाला पत्र भी सौंपा। इस पत्र में सरकार पर बेअदबी मामले को दबाने की मंशा से उन्हें झूठे केस में जेलों में बंद करने के आरोप लगाए गए है।