रसदार फलों के उत्पादन में पंजाब के कैलिफोर्निया कहे जाने वाले अबोहर के सेम प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में किन्नू के फलों की ड्रोपिंग अधिक हो रही है। इससे बागबान बेहद चिंतित हैं।
बागों में गिरे हुए फलों के ढेर लगे हैं। पिछले काफी दिनों से किन्नू के बागों में अत्यधिक ड्रोपिंग हो रही है। हालांकि इसे रोकने के लिए बागबान बागों में विभिन्न प्रकार के स्प्रे कर रहे हैं, लेकिन यह जारी है।
गांव दीवानखेड़ा निवासी प्रमुख बागबान नीरज वधवा व अजय वधवा ने बताया कि उनके क्षेत्र में सेम के कारण सैकड़ों एकड़ बागों से फलों की अंधाधुंध ड्रोपिंग हो रही है। इससे हलका बल्लूआना के गांव सप्पांवाली, पटी विला, खुईयां सरवर, कीकरखेड़ा तथा कंधवाला प्रभावित हैं।
गांव सप्पांवाली के प्रसिद्ध बागबान रवि सेतिया ने बताया कि वातावरण में आ रहे बदलाव के कारण भी फलों की ड्रोपिंग हो रही है। इस समय दिन में गर्मी और रात को सर्दी पड़ती है। इसके अलावा अगर कई दिनों बाद बागों में पानी लगाया जाता है तो यह भी फलों की ड्रोपिंग का कारण बन सकता है।
ड्रोपिंग रोकने को विभिन्न प्रकार की स्प्रे आदि कर रहे हैं लेकिन उसका कोई खास असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। किन्नू आढ़ती एसोसिएशन के सुरेंद्र चराया ने बताया कि फिलहाल मंडी में भाव 8 से 10 रुपये किलो चल रहे हैं लेकिन अगले महीनों में रेट में बढ़ोतरी होने की संभावना है। ड्रोपिंग के कारण इस बार बाजार को पूरा माल नहीं मिल पाएगा।
बागवानी विभाग प्रसार शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक पुष्पिंदर सिंह औलख ने बताया कि मौसम की असमानता के कारण ही पूरे पंजाब के किन्नू उत्पादक क्षेत्रों में ड्रोपिंग अधिक हो रही है। इसकी रोकथाम के लिए बागबानों को कृषि विभाग द्वारा प्रमाणित दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा बागों की कटिंग करते समय सूखी टहनियों की पूरी कटाई की जाए। पेड़ के ऊपरी हिस्से की इस प्रकार से काटछांट किया जाए ताकि पौधे के निचले हिस्से तक पूरी धूप पहुंच सके।