मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के आश्वासन पर भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने मरणव्रत पर बैठने का इरादा त्याग दिया। मुख्यमंत्री ने अमृतसर की लंबित विकास परियोजनाओं को पूरा करने का उन्हें आश्वासन देते हुए शनिवार को उनके क्षेत्र के लिए 2039 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की।
सिद्धू ने अपने क्षेत्र के विकास की अनदेखी का विरोध करते हुए शनिवार से अमृतसर के हाल गेट के बाहर आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की थी। लेकिन शनिवार को अनशन शुरू करने से करीब 15 मिनट पहले सिद्धू ने पत्रकारों को अनशन न करने के फैसले की जानकारी दी। सिद्धू ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें देर रात भेजे पत्र में उनकी सारी मांगें मानने की बात कही है।
सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिद्धू ने कहा कि उन्हें खुशी है कि पंजाब सरकार ने उनकी आवाज सुनकर अमृतसर में विकास कार्य शुरू करने की घोषणा की है। लेकिन अभी वह इससे संतुष्ट नहीं हैं। वे तभी संतुष्ट होंगे जब ये प्रोजेक्ट पूरे हो जाएंगे।
उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार अमृतसर को स्पेशल सिटी का दर्जा दे। एक सवाल के जवाब में सिद्धू ने कहा कि वह भाजपा के सिपाही हैं, उन्होंने पहले भी कभी पार्टी से टिकट नहीं मांगा था और भविष्य में भी नहीं मांगेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह दिया आश्वासन
सिद्धू ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके प्रोजेक्ट समय पर पूरे किए जाएंगे। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के टेंडर सात अक्तूबर को जारी कर दिए जाएंगे। अमृतसर सिटी बस सर्विस के टेंडर भी नवंबर के प्रथम सप्ताह में जारी होंगे।
स्पोर्ट्स स्टेडियम की राशि 60 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ कर दी गई है और इसके लिए टेंडर नवंबर में जारी हो जाएंगे। सीसीटीवी कैमरों के प्रोजेक्ट की राशि भी 2 करोड़ से 5 करोड़ कर दी है। यह प्रोजेक्ट नौ माह में पूरा हो जाएगा।
भंडारी पुल का एरिया भी दोगुना किया जाएगा और अमृतसर नगर सुधार ट्रस्ट को उसका पैसा लौटाया जाएगा। अगले छह माह में सारा पैसा वापस अमृतसर नगर सुधार ट्रस्ट को मिल जाएगा। शहर में तीन फलाई ओवर का काम भी छह माह में शुरू हो जाएगा।
मांगे मान लिए जाने पर भी दुखी हैं सिद्धू
सिद्धू ने कहा कि उन्हें दुख है कि जो काम पंजाब सरकार को करना चाहिए था, उसके लिए एक सांसद को मरणव्रत की धमकी देनी पड़ी। ऐसे में आम आदमी की आवाज कैसे सुनी जाती होगी।
उन्हें प्रोजेक्टों पर काम शुरू करवाने में सात वर्ष लग गए। एक सांसद को विकास व अन्य मुद्दों से दूर रखना कई प्रश्न पैदा करता है। इससे साबित होता है कि यहां लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र है।