पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग ने राज्य बिजली कारपोरेशन (पावरकॉम) को देरी से बिजली बिल अदा करने पर लगने वाले सरचार्ज को रिव्यू करने का निर्देश दिया है।
इसके लिए देश के अन्य राज्यों में लगने वाले सरचार्ज के साथ तुलना करनी होगी।
पावरकॉम विभिन्न वर्गों के उपभोक्ताओं द्वारा भरे जाने वाले जुर्माने के बारे में एक महीने के अंदर आयोग को अवगत करवाएगी।
सूत्रों के अनुसार इंडिस टावर लिमिटेड द्वारा दायर याचिका के बाद आयोग ने यह आदेश दिया है। कंपनी ने कहा था कि पावरकॉम राज्य में सबसे ज्यादा सरचार्ज ले रही है।
पूरे देश में सरचार्ज की राशि इतनी कहीं नहीं है जितना पंजाब में लोगों से वसूला जा रहा है।
कंपनी के पंजाब में 2050 टावर हैं और इस पर पांच से 25 किलोवाट तक के लोड हैं और प्रति माह करीब 12 करोड़ रुपये बिल का भुगतान किया जाता है।
पावरकॉम का बिल देरी से भरने का सरचार्ज कुल बिलिंग राशि का 10 फीसदी है।
इस तरह कंपनी को 25 लाख रुपये प्रति माह के हिसाब से जुर्माना देना पड़ता है। बिलिंग में देरी के लिए भी पावरकॉम के बिल के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
कंपनी ने आयोग के समक्ष ब्योरा दिया कि सरचार्ज देश के किसी भी राज्य में 1 से लेकर 1.5 फीसदी से ज्यादा नहीं है।
आयोग ने पावरकॉम को निर्देश दिया कि एक महीने के भीतर विभिन्न कैैटेगरियों के उपभोक्ताओं द्वारा देरी से बिल जमा करवाने के कारण भरी जाने वाली राशि का प्रस्ताव दिया जाए।
यह प्रस्ताव तैयार करने के समय देश के अन्य राज्यों द्वारा लगाए सरचार्ज को भी ध्यान में रखा जाए।
इसके अलावा ई बिलिंग को प्रोत्साहन दिया जाए। याची को पावरकॉम अपने कार्यालय और अधिकारियों की लिस्ट भी सौंपेगी, यहां से बिल लिए जा सकेंगे।
पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग की चेयरपर्सन रोमिला दुबे ने इसकी पुष्टि की है।
बाक्स- विभिन्न राज्यों में सरचार्ज
हरियाणा 1.50 फीसदी
राजस्थान 1.25
दिल्ली 1.25
गुजरात 1.25
यूपी 1.25
मध्यप्रदेश 1.50
पंजाब 10 फीसदी
आंध्र प्रदेश 1.50
केरल 1.00 फीसदी
2012-13 के दौरान विभिन्न राज्यों में बिल देरी से जमा करवाने पर कुल बिलिंग राशि पर लगने वाले सरचार्ज