पंजाब में ड्रग तस्करी में कई एनआरआई के शामिल होने का मामला सामने आया है।
इसे देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को सीबीआई को इस मामले में पक्ष बनाते हुए पूछा है की सीबीआई कैसे राज्य में फैले ड्रग के कारोबार की जांच में मदद कर सकती है।
वहीं सुनवाई के दौरान एडवोकेटे नवकिरण सिंह ने अर्जी दायर कर इस मामले में पक्ष बनाए जाने की मांग की है।
एडवोकेट नवकिरण ने अपनी अर्जी में हाल ही में ड्रग तस्कर जगदीश भोला का हवाला देते हुए बताया की अब इस कारोबार में एनआरआई भी शामिल हैं, लिहाजा इस पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाई जानी चाहिए।
पंजाब में बड़े पैमाने पर चल रहे नशे के कारोबार एवं ड्रग्स माफिया द्वारा चुनाव में पैसा लगाए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय, बीएसएफ और एनसीबी को भी पक्ष बनाया जा सकता है।
हालांकि इस मामले में रिपोर्ट दायर करने के लिए केंद्र एवं पंजाब सरकार दोनों ने ही कुछ और समय की मांग की है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय, बीएसएफ एवं एनसीबी को भी पक्ष बना लिया है।
गौरतलब है कि पंजाब के पूर्व डीजीपी जेल शशिकांत ने मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र भेजकर बताया था कि पंजाब के 70 फीसदी युवा ड्रग्स के आदी है।
इतना ही नहीं स्कूल जाने वाले प्रत्येक तीन में से एक छात्र कम से कम एक बार ड्रग्स का सेवन कर चुका है। पंजाब में ड्रग का कारोबार इतना बढ़ चुका है कि इसमें राजनेता और पुलिस के कुछ अधिकारी शामिल हैं।
पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कौल एवं जस्टिस मसीह की खंडपीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जबाव तलब किया था।
शशिकांत ने मुख्य न्यायाधीश के नाम भेजे पत्र में बताया था कि पंजाब के 65 से 70 फीसदी युवा जो 15 से 35 आयु वर्ग के हैं ड्रग्स लेते पाए गए हैं।
यूनाईटेड नेशन ऑन ड्रग्स एंड क्राइम द्वारा पंजाब को ड्रग्स एवं एड्स जैसे घातक रोग के मामलों में बेहद संवेदनशील करार दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।