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पंजाब में जिला परिषद व पंचायत समिति चुनाव: दांव पर आप की शाख, किसके साथ जाएगी जनता?

Sat, 13 Dec 2025 10:56 PM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

पंजाब में जिला परिषद व पंचायत समिति चुनाव में कहीं तिकोना तो कहीं आमने-सामने का मुकाबला, देहाती हलकों में सियासी समीकरण बदल भी सकते हैं। साल 2018 में कांग्रेस ने सत्ता का फायदा उठाते हुए जिलों में अधिकतर सीटें जीती थीं। इस बार आप की शाख दांव पर है। 
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पंजाब में जिला परिषद व पंचायत समिति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सात साल बाद रविवार को पंजाब में जिला परिषद व पंचायत समिति के चुनाव हैं। ग्रामीण अंचलों पर आधारित इस चुनाव में जीत के लिए सभी सियासी दलों ने खूब जोर लगाया। छोटे से लेकर बड़े नेताओं ने अपने-अपने प्रत्याशियों को जितवाने के लिए जमकर प्रचार किया। स्थिति देखें तो कई सीटों पर आप, शिअद और कांग्रेस के बीच तिकोना मुकाबला है तो कहीं आमने-सामने की टक्कर है।

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मुख्यमंत्री भगवंत मान का मानना है कि जिला परिषद व पंचायत समिति की कई सीटों पर भाजपा, शिअद और कांग्रेस ने आप प्रत्याशियों के खिलाफ अंदरूनी समझौता कर लिया है। उनका कहना है कि इन सीटों पर आप प्रत्याशी के खिलाफ जो मुख्य प्रतिद्वंद्वी मैदान में हैं, उनके लिए तीनों दलों के नेता व कार्यकर्ता प्रचार कर रहे हैं। इनका मकसद सिर्फ आप प्रत्याशी को हराना है।

खैर, साल 2018 में हुए इन चुनावों की स्थिति देखें तो उस वक्त कांग्रेस को सत्ता में रहने बड़ा फायदा मिला था। जिला परिषद की अधिकतर सीटें कांग्रेस प्रत्याशियों ने ही जीती थीं। बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, गुरदासपुर, लुधियाना, मानसा, रोपड़ व संगरूर में तो कांग्रेस ने पूरी तरह क्लीन स्वीप किया था। यहां किसी भी दल ने एक भी सीट नहीं जीती थी जबकि फिरोजपुर, मोगा, मोहाली व तरनतारन में शिरोमणि अकाली दल (शिअद), होशियारपुर व पठानकोट में भाजपा व जालंधर में आजाद प्रत्याशी ने 1-1 सीट पर जीत दर्ज की थी। अमृतसर व फाजिल्का में शिअद को 4-4 और श्री मुक्तसर साहिब व एसबीएस नगर में 2-2 सीटें मिलीं थी।

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शिअद ने भी दिखाया था दम

पंचायत समिति चुनाव में भी कांग्रेस का ही दबदबा था। दूसरे नंबर में शिअद थी जबकि कुछ सीटों पर भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और आजाद खड़े हुए प्रत्याशियों को विजयी प्राप्त हुई थी। सत्ता से बाहर होने के बावजूद शिअद ने अमृतसर में पंचायत समिति की 44, श्री मुक्तसर साहिब में 35, जालंधर में 33, लुधियाना में 31, संगरूर में 29, फाजिल्का में 25, होशियारपुर में 22, एसबीएस नगर में 16, बठिंडा में 15,  तरनतारन में 13, फतेहगढ़ साहिब, मानसा व कपूरथला में 12-12, पटियाला में 11 व बरनाला में 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी जितवाए थे। फरीदकोट, फिरोजपुर, गुरदासपुर, मोगा, पठानकोट व मोहाली जिले में शिअद का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर था।

आप ने एंट्री कर जीती थीं सीटें

पंचायत समिति चुनावों में भाजपा ने पठानकोट की 26, होशियारपुर की 25, फाजिल्का की 8 व बठिंडा की 5 सीटों पर अपने पंचायत समिति सदस्यों को जितवाया था जबकि अन्य जिलों में प्रदर्शन निराशाजनक था। उस वक्त आम आदमी पार्टी ने भी कई सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। हालांकि सूबे में नई पार्टी होने की वजह से आप  को ज्यादा सीटें तो नहीं मिली मगर छह जिलों तरनतारन (1), संगरूर (3), मोगा (4), मानसा (3), बठिंडा (5) व बरनाला में (5 सीटों) अपने प्रत्याशी जितवाकर आप ने अपनी हाजिरी दर्ज करवाई थी। उस वक्त यह आम आदमी पार्टी की गांवों में एंट्री थी। उसके बाद आप ने अपनी पैठ बढ़ाते हुए देहाती राजनीति में अपनी सियासी जमीन को इस कदर मजबूत किया कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में यह पार्टी भारी बहुमत के साथ चौंकाते हुए सत्ता पर काबिज हो गई। आप सरकार का 3 साल 10 महीने का कार्यकाल गुजर चुका है। अपनी विभिन्न परियोजनाओं व विकास कार्यों के बूते आप नेताओं ने इस चुनाव में प्रचार के दौरान ग्रामीण मतदाताओं को खूब रिझाया। अब देखना यह है कि क्या इस बार भी ग्रामीण मतदाता सत्तारूढ़ दल के साथ चलेगा ? या नतीजे कुछ और रहेंगे।
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