दिल्ली बम धमाके के दोषी और खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकी देविंदर पाल सिंह भुल्लर को गुपचुप तरीके से फांसी देने की तैयारी चल रही है।
एक अंग्रेजी अखबार ने दावा किया है कि भुल्लर को अजमल कसाब और अफजल गुरु की तरह चोरी-छिपे फांसी देने की योजना है। तिहाड़ जेल प्रशासन अब भुल्लर का अस्पताल से जेल आने का इंतजार कर रहा है।
फांसी की सजा बरकरार
देविंदर पाल सिंह भुल्लर को 1993 में दिल्ली में धमाका करने का दोषी पाया गया था। इस धमाके में 9 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा था।
भुल्लर का इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमेन बिहेवियर एलाइड साइंस (आईएयबीएएस) में इलाज चल रहा है। खुफिया अधिकारी अब यह तय करने में जुटे हैं कि भुल्लर को कहां फांसी दी जाए।
शव बठिंडा नहीं भेजा जाएगा
वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों का कहना है कि भुल्लर को फांसी देने के बाद उसके शव को पंजाब के बठिंडा नहीं भेजा जाएगा। उसके शव को तिहाड़ में अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और केहर सिंह को भी फांसी देने के बाद उसके शवों को उनके रिश्तेदारों को नहीं लौटाया गया था। इन दोनों के शवों का तिहाड़ में ही अंतिम संस्कार किया गया।
कौन है भुल्लर
देविंदर पाल सिंह भुल्लर ने लुधियाना के गुरुनानक इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। उसके पिता पंजाब के ऑडिट विभाग में सेक्शन अफसर और मां पंजाब ग्रामीण विकास में सुपरवाइजर थीं।
बम धमाके को अंजाम देने के बाद भुल्लर जर्मनी चला गया और वहां की सरकार से राजनीतिक शरण मांगी, लेकिन जर्मन सरकार ने उसकी अपील ठुकरा दी जिसके बाद उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया।
आतंकी हमला
11 सितंबर, 1993 को दिल्ली में युवा कांग्रेस के मुख्यालय के पास हुए ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत हो गई थी जबकि तत्कालीन युवक कांग्रेस अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा समेत 30 लोग घायल हुए थे।
यह विस्फोट बिट्टा को निशाना बनाकर किया गया था। यह हमला एक रिमोट बम के जरिए किया गया था। 29 अगस्त, 1991 में चंडीगढ़ में एसएसपी सुमेध सिंह सैनी की कार पर हुए हमले में भी भुल्लर का नाम आया था। इस हमले में एसएसपी का सुरक्षा कर्मी मारा गया था।