फूड सप्लाई विभाग की तरफ से इंस्पेक्टर ग्रेड की नियुक्तियों में अपनाई गई प्रक्रिया को गलत बताने पहुंचे कांग्रेस के प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा पिम्स मामले में पत्रकारों के सवालों से घिर गए। पत्रकारों ने जब उनसे पिम्स मामले के बारे में पूछा तो उन्होंने खुद को असहाय बताया।
उनका कहना है कि वह तो इसके विरोध में डटे हुए हैं और महज धरना ही दे सकते हैं। उन्होंने तो केंद्रीय मंत्री संतोष चौधरी को भी यहां बुला लिया था। आगे तो इस मामले को उन्हें ही देखना था। खैहरा ने कहा कि अगर केंद्रीय मंत्री चाहतीं तो एक आदेश कर पंजाब को मिलने वाली सभी ग्रांट उस समय तक बंद कर देती, जब तक यह मामला हल नहीं हो जाता। हालांकि बाद में खैहरा ने इसके अनौपचारिक बात कह न लिखने के लिए भी कहा।
इस दौरान खैहरा ने नेताओं की तरफ से दिए जा रहे बयानों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि नेता उस पार्टी का विरोध कर रहे हैं, जिसने उन्हें इतने बड़े-बड़े सम्मान दिए हैं। खैहरा ने माना कि घोषित कार्यकारिणी में कही न कहीं गलती जरूर हुई है। लेकिन इसके विरोध में समाचार पत्रों में नेताओं का जाना अकाली दल को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि नेताओं, जिन्हें कांग्रेस ने पहले कई बड़े पद दिए थे, का अब छोटी सी बात पर उनका विरोध करना विरोधी की मदद करने के बराबर है। हालांकि खैहरा ने कहा कि जो नेता बागी होकर पार्टी के खिलाफ जा चुके हैं, उन्हें पद नहीं दिए जाने चाहिए थे। यह कदम जरूर गलती भरा है। फिर भी नेताओं को विरोध करते हुए अखबार में नहीं जाना चाहिए बल्कि अपने वरिष्ठ नेताओें के साथ बातचीत करनी चाहिए।
नई कार्यकारिणी में उनके पद की घोषणा न होने पर खैहरा ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति 8 अप्रैल 2013 को जनार्दन द्विवेदी ने की थी। हाईकमान क्लीयर कर चुका है कि उनकी नियुक्ति सही है।
इस मौके पर खैहरा ने कहा कि हाल ही में पंजाब सरकार की तरफ से जो फूड सप्लाई इंस्पेक्टर के ग्रेड-2 के 461 पद भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है वह आशंकित है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। इस कैटेगिरी के लिए 1.93 लाख युवाओं ने अप्लाई किया था। दूर सेंटर बनाए जाने के कारण इस परीक्षा में महज 50 हजार आवेदक ही पहुंच सके थे।
उन्होंने कहा कि हैरानी तो यह है कि इस परीक्षा को पंजाब सरकार को रद्द करना चाहिए था। सरकार की तरफ से 4061 युवाओं की जो मैरिट लिस्ट घोषित की गई है युवाओं में भ्रम पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार की यह लिस्ट सही थी तो उन्होंने इन पदों संबंधी जो नेट पर जानकारी थी, उसे क्यों हटाया गया है।