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'चीन बढ़ता गया और हम सड़क तक नहीं बना सके'

Fri, 02 Aug 2013 12:05 AM IST
चंडीगढ़/सर्वेश कुमार
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पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने कहा कि देश को सीमा पर सड़कों समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत है। ऐसा करने पर ही जरूरत के वक्त वहां तक आसानी से पहुंचना संभव होगा।
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भारत-चीन सीमा विवाद पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सतर्कता और बढ़ाई जानी चाहिए।

कुछ बातों पर पहले गंभीरता से विचार नहीं किया गया, जिससे चुनौतियां बढ़ने लगीं। सड़क निर्माण सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में देरी की कई वजह हो सकती हैं।
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रक्षा मामलों के जानकार रिटायर्ड मेजर जनरल राज एस मेहता ने कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद को देखते हुए सीमा सड़क संगठन को और सशक्त भूमिका निभानी होगी।

चीन बॉर्डर से लगते हुए चार हजार वर्ग किलोमीटर एरिया पर हमारा दावा है जबकि पड़ोसी देश भी 2500 वर्ग किलोमीटर के इलाके में दावेदारी पेश कर रहा है।

मेहता के मुताबिक 1962 में भारत-चीन की लड़ाई के बाद देश पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ता गया। चीन सतर्क हो गया, लेकिन हमने सीमा सड़क संगठन को सीमावर्ती इलाकों से और दूर कर दिया।

पिछले पचास साल से अधिक वक्त बीतने के बाद भी चीन से लगती सीमा पर खुद को मजबूत नहीं किया गया, जबकि चीन इसमें काफी आगे चला गया।

सीमावर्ती इलाकों के पांच किलोमीटर की दूरी तक बीआरओ को सड़क निर्माण करने से रोक दिया गया। यह पाबंदी तीन साल पहले हटाई गई और इसके बाद सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई।

इस विलंब का नुकसान यह हुआ कि सीमा के उस पार लगातार हालात बदलते रहे जबकि देश की स्थिति में पिछले पचास सालों में भी कोई बदलाव नहीं आया।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बनाएं कार कोर
चीना सीमा पर रह चुके रिटायर्ड मेजर जनरल मेहता ने कहा कि सिक्किम सहित देश के सभी सीमावर्ती क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) में एक और अलग कार कोर की स्थापना जरूरी है।

अक्साई चिन के अलावा सर मैकमोहन लाइन के इस पार भारत-चीन सीमा पर ऐसी सैकड़ों जगह हैं जहां पर भारत की गैर मौजूदगी का पड़ोसी देशों ने फायदा उठाया। बॉर्डर के कई इलाके ऐसे हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं किया गया। इस वजह से हालात में कोई खास बदलाव नहीं हुए।

नक्सलियों को पकड़ने में सीमा को भूले
रिटायर्ड मेजर जनरल मेहता ने कहा कि बीआरओ को सीमावर्ती इलाकों में 78 सड़क परियोजनाओं को पूरा करना था, लेकिन पिछले 45 वर्षों के दौरान महज पांच परियोजनाओं पर काम हो सका।
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सरकार ने सीमावर्ती इलाकों से दूर कर उन्हें नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण के लिए भेज दिया, लेकिन सीमा की सुरक्षा और चौकसी अधिक जरूरी है।

ऐसा करने से बीआरओ कार्यकुशलता और परियोजनाओं को पूरा करने में नियत से 15 साल पीछे चला गया। इसे पूरा करने के लिए कई और एजेंसियों की मदद भी जरूरी है।
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