पंजाब में ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) का खतरा कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में टीबी मरीजों की संख्या में 22 फीसदी तक इजाफा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे मरीजों की पहचान है, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इन्हें ‘एसिम्प्टोमैटिक’ मरीज कहा जाता है। ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। चेस्ट एक्स-रे के जरिए स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है। साथ ही मरीजों को इलाज बीच में न छोड़ने के लिए जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि अधूरा इलाज संक्रमण को और खतरनाक बना सकता है।
पड़ोसी राज्य हरियाणा में टीबी की स्थिति पंजाब से भी ज्यादा चिंताजनक है। वर्ष 2025 में वहां 88,513 और 2024 में 86,635 मरीज दर्ज किए गए। वहीं हिमाचल प्रदेश में 14,637 और जम्मू-कश्मीर में 11,959 मामले सामने आए।
केंद्र से 46 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें मिली हैं, जिन्हें सभी जिला अस्पतालों में भेजा गया है। इससे जांच और स्क्रीनिंग बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि एक लाख लोगों पर 1200 टेस्ट किए जा रहे हैं और टीबी मुक्त भारत अभियान को और तेज किया जा रहा है। -राजेश भास्कर, राज्य टीबी अधिकारी