पंजाब में किसानों को सब्सिडी पर मिलने वाले यूरिया के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर इस संबंध में बड़ी कार्रवाई की गई है। खन्ना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दर्पण आहलूवालिया ने एफआईआर दर्ज कराई है।
खन्ना कैटल फीड प्लांट के महाप्रबंधक सुरजीत सिंह भदौड़ को नामजद किया गया है। उनके साथ कई अन्य अधिकारियों पर भी मामला दर्ज हुआ है। यूरिया आपूर्ति करने वाली गिद्दड़बाहा की इंडो आर्गेनिक्स कंपनी और नई दिल्ली की मनीषा ट्रेडिंग कंपनी के मालिकों को भी एफआईआर में नामजद किया गया है।
इस मामले की जांच अब पंजाब से बाहर नई दिल्ली तक बढ़ा दी गई है। यह मामला एक बड़े अंतरराज्यीय घोटाले का रूप लेता दिख रहा है। खन्ना के सिटी थाना-2 में कृषि विकास अधिकारी गुरप्रीत कौर के बयान पर एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस ने जांच तेज कर दी है। जांच के दौरान अन्य संबंधित पक्षों को भी नामजद किए जाने की संभावना है।
अनियमितताओं का खुलासा
जांच में सामने आया कि औद्योगिक उपयोग के लिए टेक्निकल ग्रेड यूरिया की आवश्यकता थी। इसके बजाय कृषि उपयोग के लिए सब्सिडी वाला नीम-कोटेड यूरिया इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि सब्सिडी वाले यूरिया को औद्योगिक उपयोग में लगाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। कृषि विभाग की टीम ने खन्ना कैटल फीड प्लांट में छापा मारा था। वहां से यूरिया के नमूने लिए गए थे।
पंजाब सरकार ने इस मामले में पहले ही सात अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। इन अधिकारियों को चार्जशीट किया गया है। एक अधिकारी का तबादला भी किया गया है। 25 जून को सहकारिता विभाग ने मार्कफेड और मिल्कफेड को खरीद व आपूर्ति प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे। मिल्कफेड ने प्लांट के महाप्रबंधक समेत कई अधिकारियों को भारी दंड वाली चार्जशीट जारी की है।