पंजाब सिविल सर्विसेज मेन्स एग्जाम के नतीजों पर बवाल मच गया है। चयन प्रक्रिया में अनियमितता और पक्षपात के आरोपों के बीच एक ही परीक्षा केंद्र, कक्षा और लगातार रोल नंबरों वाले अभ्यर्थियों के चयन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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पंजाब सिविल सर्विसेज (पीसीएस) मुख्य परीक्षा-2025 के नतीजों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। चयन प्रक्रिया में अनियमितता और पक्षपात के आरोपों के बीच एक ही परीक्षा केंद्र, कक्षा और लगातार रोल नंबरों वाले अभ्यर्थियों के चयन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विवाद बढ़ने पर पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आंकड़ों की गलत व्याख्या कर अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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पीपीएससी के चेयरमैन मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) विनायक सैनी के अनुसार, पटियाला के 12 केंद्रों पर हुई मुख्य परीक्षा में 3959 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 751 को इंटरव्यू के लिए चुना गया। अनुपस्थित अभ्यर्थियों को छोड़कर सफलता दर करीब 19 प्रतिशत रही।
एक केंद्र से 24 प्रतिशत अभ्यर्थियों के चयन के दावे पर आयोग ने कहा कि वहां से सर्वाधिक 106 अभ्यर्थी सफल हुए। यह कुल चयनित अभ्यर्थियों का 14.1 प्रतिशत है। उस केंद्र पर 496 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।
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एक क्लास के अभ्यर्थियों के चयन पर भी सवाल
एक ही कक्षा से 10-11 अभ्यर्थियों के चयन पर आयोग ने दलील दी कि 751 सफल अभ्यर्थी कुल 179 कक्षाओं में बैठे थे। प्रति कक्षा औसतन 4.2 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। लगातार रोल नंबरों वाले अभ्यर्थियों के चयन पर आयोग ने बताया कि 2018, 2020 और 2025 में ऐसे क्रमश: 26, 28 और 118 समूह मिले थे। इसे अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सीसीटीवी और बायोमीट्रिक से निगरानी का दावा
आयोग ने कहा कि किसी अनुपस्थित अभ्यर्थी को सफल घोषित नहीं किया गया। सभी केंद्रों पर बायोमीट्रिक और मैनुअल उपस्थिति दर्ज की गई। प्रवेश द्वारों और कंट्रोल रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। परीक्षा कक्षों में जैमर भी लगाए गए।