हरियाणा पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने तावडू के गांव कांगरका से तारीफ को गिरफ्तार किया। नूंह में दो दिन में यह दूसरी गिरफ्तारी है। तारीफ ने पूछताछ में कबूला है कि व्हाट्सएप के जरिये भारतीय सैन्य गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारी दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात दो कर्मचारियों आसिफ बलोच व जाफर को मुहैया करा रहा था। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, गोपनीयता कानून, 1923 और देशद्रोह की धाराओं के तहत तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
पंजाब के गुरदासपुर में जासूसी के आरोप में दो संदिग्धों को गिरफ्तार करने की जानकारी पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में दी। उन्होंने बताया, 15 मई को खुफिया सूचना मिली थी कि सुखप्रीत व करणबीर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी गोपनीय विवरण आईएसआई के साथ साझा कर रहे थे। उनके मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच से खुफिया जानकारी भेजे जाने की पुष्टि हुई है।
2018 से पाकिस्तानी उच्चायोग के संपर्क में था
मो. तारीफ ने कबूला कि उसने पाकिस्तानी उच्चायोग कर्मियों को सिम मुहैया कराए थे। सिरसा एयरफोर्स स्टेशन के विजुअल भी भेजे थे। वह 2018 से उच्चायोग के अफसरों के संपर्क में था और पाकिस्तान भी जा चुका है।
तारीफ ने बताया कि पाकिस्तान से लौटने पर उच्चायोग कर्मी ने उसे फोन किया और कहा कि कुछ लोगों को भेजो। तारीफ के मुताबिक, उसने पाकिस्तानी वीजा के लिए 8-10 लोगों को उसके पास भेजा। पैसे आपस में बांट लिए। उसी अधिकारी ने बाद में जाफर से मिलवाया था।
आईएसआई ने दिए एक लाख रुपये
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि सुखप्रीत और करणबीर ने पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में अपने नेटवर्क के जरिये सेना से संबंधित सूचनाएं आईएसआई को मुहैया कराईं, जिसके बदले में उन्हें एक लाख रुपये दिए गए। पुलिस ने उनके पास से तीन मोबाइल फोन और .30 बोर के आठ जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं। दोनों नशा तस्करी में भी शामिल रहे हैं और इसी के जरिये आईएसआई हैंडलर्स के संपर्क में आए थे।