एमडीसी सेक्टर-4 में दिनदहाड़े घर में घुसकर मासूम बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर डकैती करने के मामले में कोर्ट ने घरेलू नौकर समेत तीन दोषियों को सात-सात साल की कैद की सजा सुनाई है। दोषियों ने घर से साढ़े पांच लाख रुपये नकदी और लाखों रुपये के गहने लूटे थे। अदालत ने तीनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने नेपाल निवासी करन बहादुर, गोपाल उर्फ खगेंद्र सार्की और लुधियाना निवासी आसमान सिंह को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। मामले में घरेलू नौकर करन बहादुर को वारदात का मुख्य साजिशकर्ता माना गया। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर टेक बहादुर उर्फ टेका को बरी कर दिया गया।
सजा पर बहस के दौरान वकील प्रदीप शर्मा ने अदालत को बताया कि तीनों दोषियों ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया था। अभियोजन पक्ष ने मामले में पुख्ता साक्ष्य पेश किए। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों ने घर में मौजूद परिवार को डराने के लिए करीब एक साल के मासूम बच्चे को जान से मारने की धमकी दी और नकदी व आभूषण लूटकर फरार हो गए। अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की गई।
तीन नकाबपोशों ने घर में घुसकर बनाया दहशत का माहौल
मामला 20 नवंबर 2021 का है। एमडीसी सेक्टर-4 निवासी अनु वालिया के घर में दोपहर के समय डकैती हुई थी। शिकायत के अनुसार, दोपहर करीब 3:25 बजे उनका बेटा किसी काम से चंडीगढ़ गया था। उस समय घर में अनु वालिया, उनके पति और करीब एक साल का पोता मौजूद थे, जबकि उनकी बहू बाहर गई हुई थी। करीब 3:55 बजे तीन नकाबपोश युवक घर में घुस आए। एक आरोपी के हाथ में लोहे की रॉड थी, जबकि दूसरे ने घर का स्टूल तोड़कर उसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। तीसरे आरोपी के पास नुकीली वस्तु थी। घर में घुसते ही आरोपियों ने अनु वालिया के पति के साथ मारपीट की और उन्हें व उनके मासूम पोते को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद परिवार से नकदी और कीमती सामान के बारे में जानकारी हासिल की।
साढ़े पांच लाख नकद और लाखों के गहने लूटे
परिवार की शिकायत के अनुसार, बदमाश घर से करीब 5.50 लाख रुपये नकद ले गए। इसके अलावा तीन-चार सोने के सेट, छह-सात हीरे की अंगूठियां, पुखराज समेत अन्य आभूषण और अनु वालिया के पति की डायमंड रिंग भी लूट ली। वारदात के बाद घर में काम करने वाला नौकर करन बहादुर भी फरार हो गया था। इसके बाद परिवार ने उस पर वारदात में शामिल होने का शक जताया। पुलिस जांच में उसकी भूमिका सामने आने पर उसे आरोपी बनाया गया। जांच के दौरान अन्य आरोपियों की संलिप्तता भी उजागर हुई। करीब पांच साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करन बहादुर, गोपाल उर्फ खगेंद्र सार्की और आसमान सिंह को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की कैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।