चंडीगढ़ में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), एग्रीमेंट टू सेल और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरित करने वाले लोगों को चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) एक और मौका देने जा रहा है। बोर्ड की बैठक में ऐसे पुराने मामलों के लिए छह महीने की अवधि तक आवेदन विंडो दोबारा खोलने का फैसला लिया गया है। इससे उन लोगों को राहत मिल सकेगी, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2011 के आदेश से पहले संपत्ति का हस्तांतरण किया था, लेकिन पहले निर्धारित अवधि में संबंधित प्रक्रिया का लाभ नहीं ले पाए थे।
सीएचबी के इस फैसले का उद्देश्य पुराने हस्तांतरण मामलों में पात्र लोगों को अपने दस्तावेज जमा करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाभ प्राप्त करने का एक और अवसर देना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला किसी को नया मालिकाना हक देने से संबंधित नहीं है, बल्कि पहले से निर्धारित व्यवस्था के तहत पात्र लोगों को राहत देने के लिए आवेदन का अवसर दोबारा उपलब्ध करवाना है।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का 2011 का आदेश?
संपत्ति की खरीद-फरोख्त में लंबे समय तक जीपीए, एग्रीमेंट टू सेल और वसीयत जैसे दस्तावेजों के आधार पर लेनदेन होता रहा। कई मामलों में मूल आवंटी अपनी संपत्ति किसी दूसरे व्यक्ति को इन दस्तावेजों के माध्यम से हस्तांतरित कर देते थे। हालांकि, ऐसे दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति का कानूनी स्वामित्व अपने आप हस्तांतरित नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि जीपीए, एग्रीमेंट टू सेल या वसीयत के आधार पर अपने आप अचल संपत्ति का वैध हस्तांतरण नहीं माना जा सकता। संपत्ति का कानूनी हस्तांतरण पंजीकृत बिक्री विलेख यानी रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से ही होता है। इसके बाद पुराने जीपीए आधारित हस्तांतरण मामलों को लेकर अलग प्रक्रिया के तहत पात्र लोगों को राहत देने का प्रावधान किया गया था।
पहले मौका मिला, लेकिन कई लोग नहीं उठा पाए लाभ
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले जीपीए और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरित कर चुके लोगों को पहले भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने का अवसर दिया गया था। इसके लिए आवेदन की अवधि तय की गई थी। हालांकि, कई लोग विभिन्न कारणों से उस अवधि में आवेदन नहीं कर सके। कुछ लोगों को प्रक्रिया की जानकारी नहीं मिल पाई तो कुछ निर्धारित समय में अपने दस्तावेज जमा नहीं करवा पाए। ऐसे लोगों की ओर से दोबारा मौका देने की मांग उठाई जा रही थी। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए सीएचबी ने छह महीने के लिए आवेदन विंडो फिर से खोलने की सिफारिश करने का फैसला लिया है। इससे पहले अवसर से वंचित रह गए पात्र लोगों को अपने पुराने दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा।
छह महीने में जमा करवाने होंगे पुराने दस्तावेज
बोर्ड के फैसले के अनुसार, निर्धारित अवधि के दौरान संबंधित लोग अपने जीपीए, एग्रीमेंट टू सेल और संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े अन्य दस्तावेज जमा कर सकेंगे। इन दस्तावेजों की जांच निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार की जाएगी। केवल आवेदन जमा करने से किसी व्यक्ति को संपत्ति का मालिकाना हक नहीं मिल जाएगा। संबंधित मामले में निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होगा।
मालिकाना हक देने का नया फैसला नहीं
इस फैसले को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जीपीए के आधार पर संपत्ति हासिल करने वालों को सीधे मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा है। सीएचबी का उद्देश्य केवल उन पुराने मामलों में आवेदन का एक और अवसर उपलब्ध करवाना है, जो वर्ष 2011 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले हुए थे और जिनके संबंधित पक्ष पहले निर्धारित प्रक्रिया का लाभ नहीं ले पाए थे। बोर्ड की ओर से इस प्रस्ताव को आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद प्रशासन की मंजूरी और निर्धारित शर्तों के अनुसार छह महीने की आवेदन अवधि शुरू होगी। एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह भी है कि सीएचबी की पुरानी व्यवस्था में 11 अक्टूबर 2011 से पहले हुए जीपीए/एसपीए लेनदेन को कुछ शर्तों के अधीन नियमित करने का प्रावधान था। इनमें कब्जा, बकाया भुगतान, पात्रता और निर्धारित ट्रांसफर फीस जैसी शर्तें शामिल थीं।
2016 में सीएचबी ने पुरानी जीपीए ट्रांसफर नीति लागू की थी, लेकिन जनवरी 2018 से जीपीए और एसपीए के आधार पर ट्रांसफर आवेदन स्वीकार करना बंद कर दिया गया था। अब छह महीने की विंडो खोलने का फैसला उन लोगों के लिए अहम है जो पुराने लेनदेन के बावजूद औपचारिक ट्रांसफर नहीं करवा पाए हैं।