पंजाब को दहलाने की कोशिश हो रही है। ऐसे में राज्य में लगातार बढ़ रहे आतंकी हमलों पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने हाल ही में पंजाब पुलिस के साथ एक नई रिपोर्ट साझा की है। एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में पंजाब के पुलिस थानों को टारगेट कर आतंकी संगठनों द्वारा कराए जा रहे ग्रेनेड और आईईडी ब्लास्ट हमलों को लेकर खुलासा किया है।
एनआईए ने दावा किया है कि इन धमाकों को अंजाम देने के लिए खालिस्तानी आतंकी संगठन डेड ड्रॉप मॉडल को अपना रहे हैं। एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि डेड ड्रॉप मॉडल में जब भी खालिस्तानी या आतंकी संगठनों को किसी बड़ी साजिश को अंजाम देना होता है, उससे पहले वह अपना टारगेट चुनते हैं।
टारगेट की पहचान कर इस साजिश को अंजाम देने के लिए विदेश या देश में बैठे अपने हैंडलरों के जरिये उस एरिया से अपने नेटवर्क के भरोसेमंद गुर्गे को चुनते हैं। इसके बाद यह आतंकी संगठन अपने डेड ड्रॉप मॉडल यानी वो खुफिया जगह जो उनके हैंडलर या नेटवर्क के मुख्य ऑपरेटिव को पता होती है, वहां पर हथियार और गोला-बारूद पहुंचाकर घटना को अंजाम देते हैं।
चीन के बनाए डिजिटल डिवाइस का हो रहा इस्तेमाल
बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान टाइगर फोर्स और अन्य आतंकी संगठन चीन की ओर से निर्मित डिजिटल डिवाइस का बड़े स्तर पर उपयोग कर रहे हैं। एनआईए के अधिकारी ने बताया कि उन्हें रेड के दौरान अधिकतर बार ऐसे डिवाइस बरामद हुए हैं। जो डिवाइस पकड़ में आते हैं वे केवल जांच एजेंसियां, सेना या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खुफिया इनपुट शेयर करने के इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब आतंकी संगठन भी इनका बड़े स्तर पर प्रयोग कर रहे हैं।
आधुनिक युग में बदला डेड ड्रॉप मॉडल का तरीका
एनआईए के अधिकारी ने बताया कि इस एआई और एडवांस टेक्नोलॉजी के जमाने में अब आतंकी संगठन भी बड़े स्तर पर तकनीकों का उपयोग करते हैं। एनआईए को हर बार पंजाब और हरियाणा में अलग-अलग लोकेशन पर रेड के दौरान इन डेड ड्रॉप मॉडल से जुड़े इनपुट हासिल हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि माइक्रोचिप, पेनड्राइव या डिजिटल चिप के जरिये आतंकी संगठन न केवल अपने टारगेट की प्लानिंग शेयर करते हैं, बल्कि इन टारगेट को कैसे अंजाम देना है और हथियार कहां से उपलब्ध होंगे, उनके कॉन्टैक्ट और लोकेशन तक साझा की जाती है।