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इस्तीफे से नहीं बदले हालात: शिअद की आगे कांटों भरी राह, अपनों को साथ लेकर चलना चुनौती, बागी गुट का विरोध तेज

Sun, 12 Jan 2025 12:14 PM IST
अंकेश ठाकुर राजिंद्र शर्मा, चंडीगढ़

सार

पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के शिरोमणि अकाली दल की प्रधानगी से इस्तीफा देने के बाद भी पार्टी के हालात सुधर नहीं रहे हैं। शिअद के लिए आगे की राह आसान नहीं है। क्योंकि पार्टी में विरोध के सुर तेज हैं। 
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सुखबीर बादल - फोटो : X @Akali_Dal_
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विस्तार
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में पिछले समय से चल रही उथल-पथल शांत होने का नाम नहीं ले रही है। शिअद में उठ रहे विरोध के स्वरों ने पार्टी की चिंता भी बढ़ा दी है। यहां तक कि सुखबीर बादल को प्रधान पद की कुर्सी भी छोड़नी पड़ गई है, लेकिन फिर भी पार्टी के हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हालात यह है कि आज पार्टी वहीं पर आकर खड़ी हो गई है, जहां एक साल पहले थी। पार्टी के लिए अपनों को साथ लेकर चलना सबसे बड़ी चुनौती है।
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बागी गुट के विरोध से ही शिअद में पूरा विवाद उपजा था। बागी गुट के नेताओं ने अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर अकाली सरकार के समय अपने गुनाह स्वीकार किए थे। जिसके बाद ही सुखबीर बादल को तनखाहिया घोषित किया गया था और उनके साथ ही अन्य अकाली नेताओं को धार्मिक सजा सुनाई गई थी। अब बेशक शिअद के कार्यकारी प्रधान बलविंदर सिंह भूंदड़ ने 1 मार्च को प्रधान पद का चुनाव कराने की घोषणा कर दी है, लेकिन शिअद के दोबारा खड़े करने के रास्ते में समस्याएं पहले वाली ही बनी हुई हैं। यहां तक कि बागी गुट ने अपना हमला और तेज कर दिया है और वह अकाल तख्त साहिब के आदेशों को सही रूप से लागू करने के लिए अब भी अड़ा हुआ है और इसे लेकर सत्ता पर काबिज धड़े पर लगातार हमलावर है। इससे साफ है कि शिअद की आगे भी कांटों भरी राह है।
 

अयाली ने भी जाहिर की थी नाराजगी
शिअद के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली भी पार्टी के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में हार के बाद अयाली ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी की गतिविधियों से दूर रहने का एलान कर दिया था। अयाली ने कहा था कि पार्टी नेताओं की ओर से लिए गए फैसलों की वजह से अकाली दल में वैचारिक गिरावट आई है। पार्टी पहले भी किसानी और वर्तमान में पंजाब में चल रही पंथक सोच को पहचानने में विफल रही है। अब सदस्यता अभियान को लेकर अयाली की राजस्थान में ड्यूटी लगाई गई है। बागी धड़ा आरोप भी लगा चुका है कि शिअद में बदलाव की मांग करने वाले नेताओं को पार्टी पंजाब से दूर रख रही है।
 

2017 से पार्टी का ग्राफ लगातार गिरा
पंजाब में 2017 से सत्ता से हटने के बाद ही शिअद का ग्राफ लगातार गिरता रहा है। शिअद के अधिकतर वरिष्ठ नेता पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। पार्टी में खुद को सरपरस्त बताने वाले सुखदेव सिंह ढींडसा भी बागी गुट के समर्थन में खुलकर उतर आए, जिस कारण शिअद को उनकी बर्खास्तगी के आदेश जारी करने पड़े। इसी तरह पार्टी नेतृत्व में बदलाव को लेकर गुरप्रताप सिंह वडाला, बीबी जगीर कौर, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, परमिंदर सिंह ढींडसा, सिकंदर सिंह मलूका, सुरजीत सिंह रखड़ा, सुरिंदर सिंह ठेकेदार और चरणजीत सिंह बराड़ जैसे नेता शिअद लीडरशिप के सामने खड़े हो गए। इन नेताओं ने अकाल तख्त साहिब के आदेशों पर सुधार लहर भंग जरूर कर दी, लेकिन ताजा घटनाक्रम के बाद भी शिअद और बागी गुट के बीच और भी दूरियां बन गईं।
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ये नेता भी पार्टी से हुए दूर
वरिष्ठ नेताओं के पार्टी से दूर होने से संगठन पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। सीनियर नेता विरसा सिंह वल्टोहा भी पार्टी छोड़ चुके हैं। पूर्व मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों को खुद ही शिअद ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते निष्कासित कर दिया था। इसी तरह पार्टी के दो बार के विधायक सुखविंदर सुक्खी और सुखबीर बादल के खास हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों ने भी पार्टी छोड़ दी थी।
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