शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ की अध्यक्षता में सोमवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। बैठक में चार अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें सुखबीर बादल के इस्तीफे, चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा की नई इमारत के निर्माण के लिए 10 एकड़ जमीन दिए जाने, मंडियों में धान की खरीद व लिफ्टिंग के अलावा किसानों पर डीएपी खाद का संकट और बंदी सिंहों के मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ ने बताया कि अध्यक्ष सुखबीर बादल का इस्तीफा अभी मंजूर नहीं किया गया है। उनके इस्तीफे पर कमेटी के सदस्यों ने पुनर्विचार करने की मांग रखी है। ऐसे में इस्तीफे पर अब प्रदेश के सभी जिला प्रधानों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें उनके समक्ष भी इस्तीफे पर राय ली जाएगी। कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि न केवल जिला प्रधानों के साथ बल्कि प्रदेश के हर जिला में बनी इकाइयों से भी इस पर लिखित रूप में राय मांगी जाएगी।
कमेटी के सदस्यों ने भी इस्तीफा देने की पेशकश की
वर्किंग कमेटी में मौजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि इस दौरान कमेटी के सभी सदस्यों ने कहा कि अगर अध्यक्ष सुखबीर बादल का इस्तीफा मंजूर होता है तो वह भी पार्टी से इस्तीफा दे देंगे। भूंदड़ ने कहा कि जिला अध्यक्षों, हलका इंचार्जों, शिरोमणि कमेटी के सदस्यों और यूथ अकाली दल तथा महिला अकाली दल के सदस्यों ने इस्तीफा नामंजूर किए जाने की पेशकश की है। वर्किंग कमेटी की बैठक शुरू होने से पहले यूथ अकाली दल के प्रधान सरबजीत सिंह झिंझर ने वर्किंग कमेटी के समक्ष पेश होकर शिअद प्रमुख सुखबीर बादल के इस्तीफे को नामंजूर किए जाने की अपील की।
प्रशासक को तत्काल रूप से प्रस्ताव खारिज करना चाहिए: चीमा
पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा की नई इमारत बनाए जाने के लिए 10 एकड़ जमीन दिए जाने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाना एक सोची समझी साजिश है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने एक बयान दिया है जिसमें कहा है कि अभी प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पंजाब में चल रहे उपचुनावों के कारण राजनयिक बयान देने के बजाय प्रशासक को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वे इसकी अनुमति हरगिज नहीं देंगे।
आप सरकार की निंदा
कमेटी ने आप सरकार की इस बात के लिए भी निंदा की कि उसने पिछली सुनवाई की तारीख पर बंदी सिंह बलवंत सिंह राजोआणा को पैरोल पर रिहा करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया। इसने कहा कि दिल्ली की आप सरकार ने पहले बंदी सिंह दविंदरपाल सिंह भुल्लर को रिहा करने का वादा करके और फिर सात बार उनकी विशेष माफी याचिका को खारिज करके सिख समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।