पंजाब में पराली जलाने के मामलों में पिछले साल के मुकाबले करीब 70 फीसदी की कमी आई है। 15 सितंबर से लेकर 22 अक्तूबर तक वर्ष 2024 में पराली जलाने के 1581 मामले सामने आए थे, जबकि इस साल इस अवधि में मात्र 484 मामले दर्ज किए गए हैं।
पंजाब में करीब 31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। इस बार 30.79 लाख हेक्टेयर एरिया में धान की खेती हुई है जिसमें से 23.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गैर बासमती और 7 लाख हेक्टेयर में बासमती धान की रोपाई हुई है। इससे लगभग 200 लाख टन धान की पराली उत्पन्न होती है जिसका निपटारा करना सरकार के सामने प्रमुख चुनौती है।
पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर लुधियाना की रिपोर्ट के अनुसार आठ जिले हॉटस्पॉट की सूची में शामिल है। इन जिलों बात करें तो पिछली बार फिरोजपुर में 1342, तरनतारन 876, संगरूर 1725, बठिंडा 750, मोगा 691, बरनाला 262, मानसा 618 और फरीदकोट में पराली जलाने के 551 मामले सामने आए थे।
पंजाब के सात शहरों की हवा अब भी खराब है। प्रदेश के तीन शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब श्रेणी में बना हुआ है जो सांस के मरीजों के लिए खतरनाक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक 266 दर्ज किया गया है जबकि लुधियाना का 235 और जालंधर का एक्यूआई 225 दर्ज किया गया है। इसी तरह रोपड़ का 190, अमृतसर 186, खन्ना 138 का पटियाला का एक्यूआई 119 दर्ज किया गया है। सिर्फ बठिंडा का एक्यूआई ही 73 दर्ज किया गया है जिसे संतोषजनक माना जाता है।
किसानों में पहले से जागरूकता बढ़ी है और अब सिर्फ जमीनी स्तर पर जाकर उनको पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके अलावा सख्ती के साथ उनकी समस्याएं जानकर उन्हें दूर किया जाना चाहिए जिससे बेहतर नतीजे मिलेंगे। -डॉ. हर्ष नायर, प्रोफेसर, पंजाब विश्वविद्यालय।