पंजाब में महंगाई भत्ते (डीए) और अन्य लंबित मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। जालंधर में दो दिवसीय हड़ताल और धरना-प्रदर्शन के बाद कर्मचारी यूनियन नेता तेजिंदर सिंह नंगल ने पंजाब सरकार पर वादाखिलाफी और कर्मचारियों को डराने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
डीसी कार्यालय जालंधर की कर्मचारी यूनियन के नेता तेजिंदर सिंह नंगल ने कहा कि कर्मचारियों ने बिना सूचना गैरहाजिर होने के बजाय अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत सामूहिक अवकाश लेकर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर विचार करना चाहिए, लेकिन इसके बजाय अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची मांगने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जो गलत है।
नंगल के मुताबिक, 18 सितंबर को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में 8 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने और अक्टूबर के पहले सप्ताह में अन्य लंबित मांगों पर दोबारा बैठक करने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, अक्तूबर का तीसरा सप्ताह बीतने के बावजूद कर्मचारियों के अनुसार इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया।उन्होंने बताया कि बुधवार को पंजाब के मुख्य सचिव के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक चली, लेकिन कर्मचारी संगठनों को उनकी मांगों के संबंध में कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला। इससे नाराज होकर यूनियन नेताओं ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
24 को होगा अगले आंदोलन का ऐलान
तेजिंदर सिंह नंगल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले समय में संघर्ष और तेज किया जाएगा। उन्होंने राजनीतिक परिणामों का जिक्र करते हुए कहा कि कर्मचारी वर्ग चुनावों में भी अपनी नाराजगी जाहिर कर सकता है।
नंगल के अनुसार, 24 अक्तूबर को सांझी तालमेल कमेटी की अहम बैठक होगी। इसमें कर्मचारियों के अगले बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार कर उसका ऐलान किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों और पंजाब सरकार के बीच लंबित मांगों को लेकर टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सबकी नजरें 24 अक्तूबर की बैठक और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
कर्मचारियों की महाहड़ताल को भाजपा का समर्थन
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सरकारी कर्मचारियों की दो दिवसीय महाहड़ताल को समर्थन दिया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार को कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि साढ़े चार साल से कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की जा रही है।
महंगाई भत्ता (डीए), कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने सहित कई मांगें लंबित हैं। वादे पूरे नहीं होने से कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकारी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ढिल्लों ने सरकार से कर्मचारी संगठनों से बातचीत कर जायज मांगों का समयबद्ध समाधान करने की मांग की।