जसबीर जस्सी और रवनीत बिट्टू में जुबानी जंग
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पंजाब में नशा अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है। यह राजनीति, समाज और पंजाबी संगीत की दुनिया के बीच एक बड़ी बहस बन चुका है। इसी बहस के बीच भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू और मशहूर पंजाबी गायक जसबीर जस्सी आमने-सामने आ गए हैं।
बिट्टू ने गायकों से नशे और हथियारों का महिमामंडन करने वाले गीतों से दूरी बनाने की अपील की। जस्सी ने पलटवार करते हुए सरकार के नशा विरोधी अभियान में शामिल चेहरों पर सवाल उठाया। यह बयानबाजी भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा के दौरान हुई है। भाजपा ने 18 सितंबर से यह यात्रा शुरू की है। यह यात्रा राज्य के 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी। 13 दिन के इस अभियान का समापन 30 सितंबर को जालंधर में होना है। भाजपा का उद्देश्य नशे के खिलाफ जागरूकता को जन आंदोलन में बदलना है। पार्टी ने कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को भी अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
जस्सी ने भाजपा नेता तरुण चुघ और गायक यो यो हनी सिंह की मुलाकात के बाद आपत्ति जताई। उन्होंने हनी सिंह को नशा विरोधी अभियान से जोड़ने पर सवाल उठाया। जस्सी का तर्क है कि हनी सिंह के पुराने गीतों पर नशे की संस्कृति को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। भाजपा का कहना है कि हनी सिंह ने खुद नशे की समस्या का सामना किया है। उनकी व्यक्तिगत कहानी युवाओं को नशे से बाहर आने के लिए प्रेरित कर सकती है। तरुण चुघ ने 26 मई 2026 को हनी सिंह से मुलाकात कर इस पहलू पर जोर दिया था।
कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी
रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि संगीत का युवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नशे और हिंसा को बढ़ावा देने वाले गीत समाज के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने कलाकारों से अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझने की अपील की। यह बयान संगीत जगत में कलाकारों की जवाबदेही पर पुरानी बहस को फिर से उठाता है। कलाकारों को अपनी लोकप्रियता के सामाजिक प्रभाव पर विचार करना चाहिए।
अभियान के चेहरों पर सवाल
जसबीर जस्सी ने सवाल किया कि नशा विरोधी अभियान के लिए लोकप्रियता ही एकमात्र पैमाना क्यों है। उन्होंने कलाकार की सांस्कृतिक छवि और पुराने काम को भी देखने की बात कही। जस्सी ने भाजपा पर पंजाब को न समझने या जानबूझकर चिढ़ाने का आरोप लगाया। उनका हमला उस राजनीतिक सोच पर था जो लोकप्रिय चेहरों का इस्तेमाल करती है। यह सोच कलाकार की व्यक्तिगत कहानी को अभियान के लिए उपयोग करती है।
स्पष्ट सांस्कृतिक नीति की मांग
जस्सी ने बहस को संगीत की जिम्मेदारी और सांस्कृतिक नीति तक पहुंचाया है। उनका कहना है कि सरकार को केवल बयान नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यह नीति नशे और हथियारों को बढ़ावा देने वाले गीतों के प्रसार पर होनी चाहिए। डिजिटल मंचों और कलाकारों की सामाजिक जवाबदेही भी इसमें शामिल हो। यह विवाद पंजाब में नशे के खिलाफ सियासी-सांस्कृतिक लड़ाई का केंद्र बन गया है।