पार्टी में बगावत के बाद से बढ़ा इस्तीफे का दबाव
पंजाब में शिअद के पतन भले ही बेअदबी की घटनाओं के बाद शुरू हो गया था लेकिन जब तक प्रकाश सिंह बादल जीवित रहे, पार्टी में विरोधी सुर मुखर नहीं हुए। उनके निधन के बाद से ही वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी प्रधान सुखबीर बादल पर निशाना साधना शुरू कर दिया। पार्टी प्रधान को बदलने की मांग उठने ली। सुखबीर प्रधानगी छोड़ने को राजी नहीं हुए तो कई वरिष्ठ नेताओं ने शिअद का साथ छोड़ अलग पार्टी बना ली। प्रेम सिंह चंदूमाजरा, गुरप्रताप वडाला और बीबी जागीर कौर समेत कई नेताओं ने सुधार लहर को शिअद के बराबर खड़ा कर दिया। बेअदबी के मामलों को लगातार उठाकर सुखबीर पर इस्तीफे के लिए दबाव डाला।
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अकाल तख्त से घोषित हो चुके हैं तनखाहिया
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर बागी अकालियों ने एक जुलाई को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाए थे कि अकाली दल की सरकार के दौरान विभिन्न धार्मिक गलतियां की गई हैं। इसके लिए अकाली दल का नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है। सरकार में सुखबीर बादल डिप्टी सीएम थे। इसके बाद सुखबीर बादल 30 अगस्त को जत्थेदार रघबीर सिंह द्वारा तनखाहिया घोषित किए गए थे। इसके बाद सुखबीर को धार्मिक सजा दी गई थी।
इसी सजा के दाैरान चार दिसंबर को श्री हरमंदिर साहिब में सुखबीर बादल पर जानलेवा हमला हुआ। हमले में बादल बाल-बाल बच गए थे। स्वर्ण मंदिर में बादल पर गोली चलाई गई है। वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया था।
अभी बलविंदर सिंह भूंदड़ हैं कार्यकारी अध्यक्ष
तनखाहिया करार होने के कारण सुखबीर बादल चुनाव प्रचार व अन्य राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते थे। सुखबीर सिंह बादल ने पार्टी के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ को शिरोमणि अकाली दल का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया था।